होर्मुज ‘टैक्स’! ईरान ने ट्रंप की रणनीति को क्या ‘अर्थ’ के जाल में फंसाया?

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नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को लेकर असली खेल उनके हालिया बयानों में साफ झलकता है—एक तरफ कड़ी चेतावनी और दूसरी तरफ सीमित युद्ध का संकेत। उन्होंने कहा कि अगर ईरान नहीं झुका तो “हम उन्हें मारते रहेंगे,” लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि यह संघर्ष “दो-तीन हफ्तों में खत्म हो सकता है” और अमेरिका इसमें लंबे समय तक नहीं रहेगा।

बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त रहीं वीणा सिकरी ने इसे रणनीति का हिस्सा या मिस कैल्कुलेशन का नतीजा बताया। सिकरी बोलीं, “नहीं, ये लिमिटेड युद्ध नहीं है। हाल ही में 900 किलोग्राम इस्फाहान पर बम फेंका। बस थोड़ी देर का विराम सिर्फ इस बात को लेकर दिया कि हम पावर प्लांट को अटैक नहीं करेंगे।”

ट्रंप के बयान यह भी दिखाते हैं कि वह इस टकराव को “कंट्रोल्ड वॉर” की तरह देख रहे हैं—जहां अचानक हमले, मनोवैज्ञानिक दबाव और अनिश्चितता के जरिए विरोधी को बातचीत के लिए मजबूर किया जाए। उन्होंने यह तक कहा कि अमेरिका के बाहर निकलते ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अपने आप खुल जाएगा, जिससे यह संदेश गया कि वाशिंगटन खुद को इस संकट का केंद्र मानता है और मानता है कि उसके हटते ही हालात सामान्य हो जाएंगे।

लेकिन ईरान ने इस रणनीति को समझकर खेल को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। ईरानी नेताओं और अधिकारियों के बयानों में अब सीधा संदेश है कि “दबाव डालकर झुकाया नहीं जा सकता” और “युद्ध कब खत्म होगा, यह हम तय करेंगे, अमेरिका नहीं।” ईरान ने अमेरिकी नीति को “विरोधाभासी” बताते हुए कहा कि वाशिंगटन कभी बातचीत की बात करता है तो कभी धमकी देता है, जिससे उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

इसी समझ के आधार पर ईरान ने सबसे बड़ा कदम आर्थिक मोर्चे पर उठाया है। उसने संकेत दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर “टैक्स या टोल” लगाया जा सकता है। ईरानी संसद और अधिकारियों के बयानों में यह कहा गया कि जो देश इस मार्ग का उपयोग करेंगे, उन्हें उसकी “सुरक्षा” के बदले भुगतान करना होगा। यह सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश है—अगर दबाव बढ़ेगा तो तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार को हथियार बनाया जाएगा।

ईरान ने इससे भी आगे बढ़कर चेतावनी दी कि हालात बिगड़ने पर “एक बूंद तेल भी नहीं गुजरने दिया जाएगा।” इस बयान का असर तुरंत वैश्विक बाजारों में दिखा, जहां तेल की कीमतों में उछाल आया और अनिश्चितता बढ़ी। इससे साफ हो गया कि तेहरान अब सीधे सैन्य टकराव के बजाय लागत बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है—यानी संघर्ष को इतना महंगा बना देना कि विरोधी खुद पीछे हटने पर मजबूर हो जाए।

इस पूरे घटनाक्रम में अब टकराव की प्रकृति बदल चुकी है। एक तरफ ट्रंप हैं, जो तेज दबाव, सीमित युद्ध और राजनीतिक संदेशों के जरिए जल्दी परिणाम चाहते हैं। दूसरी तरफ ईरान है, जिसने समय, बाजार और अब “होर्मुज टैक्स” को हथियार बनाकर इस रणनीति को चुनौती दी है। यही कारण है कि यह संघर्ष अब सिर्फ सैन्य शक्ति का नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, मनोविज्ञान और वैश्विक ऊर्जा नियंत्रण का जटिल खेल बन गया है।