काठमांडू, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से तमाम देश फ्यूल संकट से बचने के उपाय ढूंढ रहे हैं। इस फेहरिस्त में नया नाम नेपाल का जुड़ गया है। सरकार ने एनर्जी संकट से निपटने के लिए सरकारी महकमे और शैक्षिक संस्थानों के लिए वर्किंग वीक को छह दिन से घटाकर पांच दिन कर दिया है।
हिमालयी देश में अब तक शनिवार ही हर हफ्ते की छुट्टी का एकमात्र दिन था।
नेपाल के विभिन्न मीडिया आउटलेट्स ने सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल के हवाले से इसकी जानकारी दी। पोखरेल ने पत्रकारों को बताया कि रविवार (5 अप्रैल) को हुई मंत्री परिषद की बैठक में जो निर्णय लिया वो चैत्र 23 (6 अप्रैल) से प्रभावी होगा। शनिवार और रविवार को सार्वजनिक अवकाश देने का फैसला लिया है। दो दिन का वीकेंड इसी हफ्ते से लागू होगा।
पोखरेल ने कहा, “ईंधन आपूर्ति की वजह से बनी मौजूदा मुश्किल स्थिति को देखते हुए, सरकारी और शैक्षिक संस्थान दो दिन बंद रहेंगे।”
सरकारी कार्यालयों के समय में परिवर्तन किया गया है। अब ये सोमवार- शुक्रवार तक, सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चलेंगे। हालांकि, बदले हुए काम के घंटे शैक्षिक संस्थानों पर लागू नहीं होंगे। सरकार ने कहा कि इस कदम का मकसद देश में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की अनियमित सप्लाई से पैदा होने वाली चुनौतियों को दूर करना है।
इससे पहले भारत का एक और पड़ोसी छुट्टी का ऐलान कर ईंधन बचाने की मुहिम को आगे बढ़ा चुका है। श्रीलंका सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए सरकारी दफ्तरों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों को हर बुधवार बंद रखने का फैसला किया था। जिसका उद्देश्य ऊर्जा बचाना और सीमित संसाधनों का प्रबंधन करना बताया गया। वहीं, ईंधन की कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार ने क्यूआर-कोड आधारित ईंधन राशनिंग प्रणाली भी लागू की थी।
श्रीलंका सरकार ने 17 मार्च को ही ऐलान किया था कि हफ्ते में चार दिन ज्यादातर स्कूल और दफ्तर बंद रहेंगे।


