नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री (ईएएम) एस जयशंकर और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच ने सोमवार को नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की विस्तार से समीक्षा की। सैदोव इन दिनों भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं।
बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “अपने मित्र और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव से मिलकर खुशी हुई। हमने अपनी रणनीतिक साझेदारी की विस्तार से समीक्षा की, जिसमें ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, व्यापार, रक्षा, शिक्षा और संस्कृति पर विशेष ध्यान दिया गया। हमने क्षेत्रीय चुनौतियों पर भी चर्चा की और बहुपक्षीय सहयोग को और बढ़ाने के बारे में विचारों का आदान-प्रदान किया।”
बैठक की शुरुआत में अपने संबोधन में जयशंकर ने भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों में लगातार बनी हुई सकारात्मक गति की सराहना की।
उन्होंने कहा, “भारत में हम उज्बेकिस्तान को अपने विस्तारित पड़ोस का हिस्सा मानते हैं। दोनों देशों के बीच लोगों, विचारों और वस्तुओं का आदान-प्रदान हमेशा होता रहा है। हमारे बीच बहुत पुराने और गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं।”
जयशंकर के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं और अब उनका दायरा कई क्षेत्रों तक फैल चुका है। इनमें निर्माण, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि भारत खनन (माइनिंग) क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है। साथ ही उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 1 अरब डॉलर के करीब पहुंच चुका है, लेकिन इसमें अभी और बढ़ोतरी की काफी संभावना है।
इससे पहले दिन में उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि यह यात्रा द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाने का अच्छा अवसर है।
राष्ट्रपति सचिवालय ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “उज्बेकिस्तान गणराज्य के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध हैं, जिनकी जड़ें प्राचीन व्यापार मार्गों से जुड़ी हैं। दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि यह यात्रा द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने और विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों की पारस्परिक रूप से लाभदायक साझेदारी को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करती है।”

