नासिक के कथित ‘ढोंगी बाबा’ अशोक खरात पर ईडी की कार्रवाई, मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच शुरू

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नासिक, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में कथित तौर पर लोगों को झांसे में लेकर ठगी और गंभीर अपराधों को अंजाम देने वाले नासिक के तथाकथित ‘गॉडमैन’ अशोक खरात की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने खरात और उसके सहयोगियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करते हुए ईसीआईआर फाइल की है। यह केस 4 अप्रैल को मुंबई स्थित ईडी दफ्तर में दर्ज किया गया।

दरअसल, अशोक खरात के खिलाफ नासिक, शिर्डी, वावी और सरकारवाड़ा समेत कई पुलिस थानों में पहले से ही कई एफआईआर दर्ज हैं। इन मामलों में उस पर दुष्कर्म, धोखे से यौन संबंध बनाने और अंधविश्वास फैलाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

इसके अलावा उस पर महाराष्ट्र के ‘मानव बलि और अन्य अमानवीय, अघोरी प्रथाओं व काला जादू निषेध अधिनियम 2013’ की धाराओं के तहत भी केस दर्ज हैं।

ईडी ने इन्हीं एफआईआर का संज्ञान लेते हुए अब मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि खरात ने लोगों को किस तरह से अपने जाल में फंसाया और उनसे पैसे और संपत्ति कैसे हासिल की। फिर उस अवैध कमाई को किन तरीकों से वैध बनाने की कोशिश की गई।

जांच में यह भी देखा जाएगा कि इस पूरे नेटवर्क में खरात के साथ कौन-कौन लोग शामिल थे। ईडी को शक है कि उसके कुछ करीबी सहयोगियों ने न सिर्फ ठगी को अंजाम देने में मदद की। फिलहाल ईडी की टीम दस्तावेजों और बैंक ट्रांजैक्शन्स की पड़ताल कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है।

बता दें कि स्वयंभू बाबा अशोक खरात से जुड़े मामले की जांच के दौरान एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। वह पहले से ही आध्यात्मिकता के नाम पर महिलाओं के यौन शोषण और आर्थिक धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों का सामना कर रहा है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अशोक खरात ने कथित तौर पर 2021–22 के दौरान 130 से अधिक फर्जी बैंक खाते खुलवाए थे, ऐसा क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने बताया। ये खाते अलग-अलग लोगों के नाम पर खोले गए थे और इनके जरिए करोड़ों रुपए के लेन-देन किए जाते थे।

अधिकारियों के अनुसार, इन खातों का संचालन समता क्रेडिट संस्थान और जगदंबा क्रेडिट संस्थान जैसे वित्तीय संस्थानों के माध्यम से किया जाता था।

एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि इन सभी खातों में खरात खुद नॉमिनी के रूप में दर्ज था। जांचकर्ताओं के मुताबिक, सबूत मिले हैं कि इन खातों के जरिए एक ही दिन में लाखों रुपए तक का लेन-देन होता था। अधिकारियों का अनुमान है कि अब तक इस नेटवर्क के जरिए 50 करोड़ रुपए से अधिक का लेन-देन हो चुका है।