Tuesday, May 26, 2026
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ऑपरेशन साइहॉक 4.0 में दो और धोखेबाज गिरफ्तार, मॉर्फ्ड फोटो से ब्लैकमेलिंग का खुलासा

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नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने नकली लोन ऐप्स के जरिए होने वाली धोखाधड़ी के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। ऑपरेशन साइहॉक 4.0 के तहत दक्षिण-पश्चिम जिले की साइबर पुलिस ने दो और कुख्यात धोखेबाजों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह के सदस्य पाकिस्तान और बांग्लादेश के वर्चुअल नंबरों का इस्तेमाल कर पीड़ितों को ठग रहे थे।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों के नाम करण कुमार (24 वर्ष) और शमी अहमद (27 वर्ष) हैं। दोनों कापसहेड़ा (कपाशेरा) इलाके के निवासी हैं। इनके कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनमें आपत्तिजनक व्हाट्सएप चैट्स और नकली लोन ऐप घोटाले से जुड़े सबूत मौजूद हैं।

दिल्ली पुलिस के डीसीपी (दक्षिण-पश्चिम) अमित गोयल ने बताया कि पहले ऑपरेशन साइहॉक 4.0 में 4 धोखेबाजों को गिरफ्तार किया जा चुका था। अब इस गिरोह के दो और सक्रिय सदस्यों को पकड़ा गया है। आरोपियों ने पीड़ितों को बिना गारंटी के लोन देने का झांसा देकर ठगा और बाद में उनकी मॉर्फ्ड तस्वीरें शेयर करने की धमकी देकर पैसे ऐंठे।

जांच में पता चला कि आरोपियों ने बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ इंडिया के कुछ खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में इस्तेमाल किया। इन खातों में ठगी का पैसा जमा कराकर बाद में उसे यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए निकाला जाता था। पकड़े गए मोबाइल फोनों से विदेशी वर्चुअल नंबरों से हुई चैट्स भी बरामद हुई हैं, जिनमें पाकिस्तान और बांग्लादेश के हैंडलर्स के संपर्क साफ दिख रहे हैं।

डीसीपी अमित गोयल ने बताया कि पीड़ित जैसे ही नकली लोन ऐप पर रजिस्टर करते, उनका मोबाइल डेटा बैकएंड टीम के पास चला जाता। लोन की पहली किस्त कटते ही आरोपी पीड़ित और उसके परिवार को मॉर्फ्ड फोटो भेजकर ब्लैकमेल करते। ठगी की रकम म्यूल अकाउंट्स में जमा होने के बाद उसे क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीटी) में बदलकर सुराग मिटा दिया जाता था।

करण कुमार रैपिडो ड्राइवर है और शमी अहमद भी इसी पेशे से जुड़ा है। दोनों ने कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते जालसाजों को दिए थे। शमी अहमद ने अपना खाता राहुल नामक व्यक्ति को आगे दिया, जो गिरोह का और सदस्य है।

दिल्ली पुलिस की साइबर टीम इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में काम कर रही है। पूरे ऑपरेशन की निगरानी एसीपी संघमित्रा ने की। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि पाकिस्तान-बांग्लादेश के वर्चुअल नंबरों का इस्तेमाल भारत में बैठे अपराधी कर रहे थे या विदेश में बैठे हैंडलर सीधे संपर्क में थे।