जन्मतिथि विशेष: भारतीय टीम के पूर्व ऑलराउंडर मनोज प्रभाकर के नाम है ये विश्व रिकॉर्ड

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नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। मनोज प्रभाकर का नाम भारतीय क्रिकेट के बेहतरीन तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर में लिया जाता है। वह भारतीय टीम के लिए गेंदबाजी की शुरुआत करते थे और निचले क्रम के बेहतरीन बल्लेबाज थे। प्रभाकर ने कई बार टीम इंडिया के लिए बल्लेबाजी में भी पारी की शुरुआत की।

मनोज प्रभाकर का जन्म 15 अप्रैल, 1963 को गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था। वह दाएं हाथ के मध्यम गति के तेज गेंदबाज और दाएं हाथ के बल्लेबाज थे। दिल्ली के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले प्रभाकर ने भारतीय टीम के लिए वनडे में 8 अप्रैल, 1984 को श्रीलंका के खिलाफ शारजाह और 12 दिसंबर, 1984 को इंग्लैंड के खिलाफ दिल्ली में टेस्ट में डेब्यू किया था। वह 1996 तक लगातार भारतीय टीम का हिस्सा रहे।

इस दौरान प्रभाकर ने 39 टेस्ट की 68 पारियों में 96 विकेट लिए। एक पारी में 5 विकेट लेने की उपलब्धि 3 बार हासिल की। वहीं टेस्ट की 58 पारियों में 1 शतक और 9 अर्धशतक लगाते हुए 1600 रन बनाए। वनडे की 130 पारियों में 157 विकेट लेने के अलावा 98 पारियों में 21 बार नाबाज रहते हुए 1858 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 2 शतक और 11 अर्धशतक निकले।

प्रभाकर के नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा बार बल्लेबाजी और गेंदबाजी की शुरुआत का रिकॉर्ड है। प्रभाकर ने अपने करियर में 45 बार वनडे और 20 बार टेस्ट में गेंदबाजी और बल्लेबाजी की शुरुआत की थी। प्रभाकर को उनकी गेंदबाजी के लिए याद किया जाता है, जो उनकी सबसे बड़ी खूबी थी। वह धीमी गेंद, आउट स्विंगर का इस्तेमाल करते थे।

वह 1985 वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ क्रिकेट, 1984 एशिया कप, 1990-91 एशिया कप और 1995 एशिया कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे।

दिल्ली के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले प्रभाकर ने 154 प्रथम श्रेणी मैचों में 385 विकेट लेने के अलावा, 7,469 रन बनाए, वहीं 214 लिस्ट ए मैचों में 269 विकेट लेने के अलावा 4,118 रन बनाए।

1996 में उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।

क्रिकेट से संन्यास के बाद प्रभाकर कोचिंग के क्षेत्र में आए थे। वह दिल्ली क्रिकेट टीम के गेंदबाजी कोच और राजस्थान क्रिकेट टीम के हेड कोच रहे हैं। वह अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के गेंदबाजी और नेपाल क्रिकेट टीम के हेड कोच भी रह चुके हैं।

प्रभाकर का विवादों से भी गहरा नाता रहा है। उन पर मैच फिक्सिंग के आरोप भी लगे हैं। 2011 में, खिलाड़ियों और चयनकर्ताओं की सार्वजनिक रूप से आलोचना करने के बाद उन्हें दिल्ली क्रिकेट टीम की कोचिंग से हटा दिया गया था।

फिलहाल प्रभाकर क्रिकेट से दूर अपने परिवार के साथ जिंदगी बिता रहे हैं।