नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर गुरुवार से तीन दिवसीय संसद का विशेष सत्र शुरू है। विपक्ष ने एक बार फिर सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने कहा कि पूरा विपक्ष महिला आरक्षण के समर्थन में एकमत है, लेकिन सरकार इसे परिसीमन से जोड़कर गलत मंशा से काम कर रही है।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि हर व्यक्ति के अपने विचार हो सकते हैं, लेकिन पूरा विपक्ष एकमत होकर महिला आरक्षण के समर्थन में है। हम उस बिल के साथ खड़े हैं, जो 2023 में पास हुआ था। अगर आप वाकई गंभीर हैं तो मौजूदा लोकसभा की सदस्य संख्या के आधार पर ही आरक्षण को तुरंत लागू करें। आपको कौन रोक रहा है। परिसीमन की आड़ में और इसे संवैधानिक दायरे से बाहर ले जाकर जो कोशिश की जा रही है, वह किसी गलत मंशा से प्रेरित लगती है। इस तरह का रवैया देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ है।
प्रमोद तिवारी ने आगे कहा कि देश की एकता और अखंडता के लिए संपूर्ण विपक्ष एक है और चर्चा से साफ लगता है कि सरकार के पास कोई जवाब नहीं है।
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने महिला आरक्षण विधेयक पर कहा कि महिला आरक्षण का कोई विरोध नहीं कर रहा है। इस मुद्दे पर सभी दल एकजुट हैं। 2023 में भी हम सभी लोग सहमत थे। जिस तरह से ट्विस्ट किया है भाजपा की सरकार ने-परिसीमन में जोड़ा है- वह बहुत खतरनाक है। विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। हम लोग महिला आरक्षण के समर्थक हैं।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के बयान पर तारिक अनवर ने कहा कि यह उनकी निजी राय है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण में कोई दिक्कत नहीं है। इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए। आप इसे परिसीमन से क्यों जोड़ रहे हैं। यही हमारी सबसे बड़ी चिंता है। परिसीमन को लेकर कई मुद्दे और सवाल हैं, और इस पर लंबी चर्चा की जरूरत है। सरकार ऐसी चर्चा के लिए तैयार नहीं है और सब कुछ दो-तीन दिनों में ही निपटा देना चाहती है। ऐसा नहीं हो सकता है कि दो से तीन दिन में यह सब हो जाए।
कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने कहा कि हमने पहले इसकी शुरुआत क्यों नहीं की। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि उस समय हमारी गठबंधन की सरकार थी, जबकि उनके पास पूर्ण बहुमत था। वे भी इस बिल को काफी देर से लेकर आए। इसे 2023 में पेश किया गया और पास भी कर दिया गया, लेकिन उसके बाद क्या वे बस सो गए और निष्क्रिय बने रहे। अब अचानक उनके मन में यह बात कैसे आई, खासकर तब जब नई जनगणना शुरू होने वाली है। इस समय, कुछ राज्यों में चुनावों के दौरान, वे इसे आगे लेकर आए हैं।

