Sunday, June 7, 2026
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धीरेंद्र शास्त्री के ‘दोस्ती जिहाद’ बयान पर छिड़ी बहस, कुछ संतों ने जताई नाराजगी तो कुछ ने सराहा

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अयोध्या, 7 जून (आईएएनएस)। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा हाल ही में दिए गए कथित ‘दोस्ती जिहाद’ संबंधी बयान पर संत समाज की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां कुछ संतों ने उनके विचारों का समर्थन करते हुए युवाओं को सतर्क रहने की सलाह दी है तो वहीं कुछ संतों ने इसे समाज में विवाद और तनाव पैदा करने वाला बयान बताते हुए इसकी आलोचना की है। इस मुद्दे पर अयोध्या और हरिद्वार के कई प्रमुख संतों ने अपनी राय व्यक्त की है।

अयोध्या के महंत डॉ. देवेशाचार्य महाराज ने कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि बागेश्वर बाबा एक धार्मिक उपदेशक हैं। एक धार्मिक उपदेशक को ऐसे बयान नहीं देने चाहिए। धार्मिक नेता की भूमिका समाज में शांति स्थापित करना होती है, लेकिन ऐसा लगता है कि बागेश्वर बाबा सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए विवादित बयान दे रहे हैं।” उन्होंने कहा कि यदि धीरेंद्र शास्त्री राजनीतिक बयानबाजी करना चाहते हैं तो उन्हें राजनीति के मैदान में उतरना चाहिए, भाजपा से जुड़कर चुनाव लड़ना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया, “ऐसे ही लोगों की वजह से ऐसा होता है। वे दूसरों को उकसाते हैं और जब कोई घटना होती है तो उसे ‘दोस्ती जिहाद’ या ‘लव जिहाद’ जैसा नाम दे देते हैं। यह देश के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे धार्मिक नेताओं पर रोक लगाने की सख्त जरूरत है।”

इसी मुद्दे पर अयोध्या के आर्य संत वरुण दास महाराज ने कहा, “मुसलमानों का विश्वास कुरान और जिहाद पर टिका है। मुसलमानों का विश्वास पाकिस्तान पर टिका है। मुसलमानों का विश्वास भारत को शरिया के अधीन लाने पर टिका है। अगर वे किसी भी तरह से जीते हैं तो वह सिर्फ इस्लाम के लिए होता है। उनके मन में यह विश्वास भरा होता है कि जो कोई भी इस्लाम को नहीं मानता, वह काफिर है। धीरेंद्र शास्त्री को भी इस घटना को लेकर सावधान रहना चाहिए, क्योंकि वे भी दुबई और दूसरी जगहों पर जा रहे हैं।”

वहीं, अयोध्या के सीताराम दास महाराज ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री ने जो कहा है, वह उनकी दृष्टि में पूरी तरह सही है। कट्टरपंथी विचारधाराएं विभिन्न तरीकों से समाज को प्रभावित करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने युवाओं को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि उन्हें किसी भी प्रकार के प्रलोभन या वैचारिक प्रभाव से बचना चाहिए।

उधर, हरिद्वार में महानिर्वाणी अखाड़े के अध्यक्ष रविंद्र पुरी ने कहा, “यह तारीफ की बात है कि धीरेंद्र शास्त्री ने बार-बार ऐसे मुद्दों पर बात की है। समाज को सही रास्ता दिखाना धार्मिक नेताओं की भी जिम्मेदारी है। मैं सरकार और राजनीतिक नेताओं से भी अपील करूंगा कि दोनों धर्मों के वरिष्ठ धार्मिक नेताओं की एक संयुक्त बैठक होनी चाहिए। इस तरह ‘लैंड जिहाद’, ‘लव जिहाद’ और ‘फूड जिहाद’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए जा रहे हैं और अब ‘फ्रेंड जिहाद’ का कॉन्सेप्ट भी सामने आया है।”

धीरेंद्र शास्त्री के बयान को लेकर महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश ने कहा, “हम इसका समर्थन करते हैं, और निश्चित रूप से, जिस तरह ‘लैंड जिहाद’, ‘लव जिहाद’ और ‘फूड जिहाद’ जैसी घटनाओं की खबरें आई हैं, अब ‘फ्रेंड जिहाद’ का कॉन्सेप्ट भी सामने आया है। ईद के दिन गाजियाबाद में हुई बेरहम हत्या ने देश के पूरे हिंदू समाज को चिंता में डाल दिया है।”