नई दिल्ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत की सबसे पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थयात्राओं में से एक चारधाम यात्रा का 2026 सीजन शुरू हो गया है। छह महीने की शीतकालीन बंदी के बाद अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खोल दिए गए हैं। वैदिक मंत्रोच्चार, ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्तिमय माहौल के बीच जैसे ही मंदिरों के द्वार खुले, पूरा वातावरण आस्था और भक्ति से भर गया। इसी के साथ, लाखों श्रद्धालुओं की प्रतीक्षित यात्रा की आधिकारिक शुरुआत हो गई।
चारधाम यात्रा को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और मोक्षदायी माना जाता है। यह यात्रा हिमालय की ऊंचाइयों में बसे चार प्रमुख धामों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ से होकर गुजरती है। मान्यता है कि इस यात्रा से व्यक्ति को आत्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। परंपरा के अनुसार यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से होती है, फिर गंगोत्री, उसके बाद केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ के दर्शन किए जाते हैं।
2026 के लिए यात्रा का कार्यक्रम भी तय कर दिया गया है। यमुनोत्री धाम 19 अप्रैल से 11 नवंबर तक खुला रहेगा, वहीं गंगोत्री धाम 19 अप्रैल से 10 नवंबर तक श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध रहेगा। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खोले जाएंगे और 11 नवंबर तक खुले रहेंगे। इसके बाद बद्रीनाथ धाम 23 अप्रैल से 13 नवंबर तक भक्तों के लिए दर्शन हेतु खुला रहेगा।
श्रद्धालुओं में इस बार भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग इन पवित्र धामों की ओर रुख कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस बार यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में यात्री शामिल हो सकते हैं।
प्रशासन की ओर से भी यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। यात्रा मार्गों पर साफ-सफाई, पार्किंग और ठहरने की सुविधाओं को बेहतर किया गया है। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल टीमों की भी तैनाती की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।
इसके अलावा पुलिस और SDRF की टीमें लगातार निगरानी में रहेंगी। पहाड़ी इलाकों में मौसम और भूस्खलन जैसी संभावित आपदाओं को ध्यान में रखते हुए विशेष आपदा प्रबंधन योजना तैयार की गई है। यात्रियों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर और कंट्रोल रूम भी सक्रिय कर दिए गए हैं।
यात्रा के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया पहले से ही शुरू कर दी गई है, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो।

