वैश्विक संघर्षों में मौके तलाशना पाकिस्तान की पुरानी आदत : मनोज मुकुंद नरवणे

0
7

गुरुग्राम, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के पूर्व थल सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे ने पाकिस्तान की रणनीति और उसके व्यवहार पर बड़ा बयान दिया है।

उन्होंने आईएएनएस कहा कि पाकिस्तान हर बार वैश्विक तनाव और संघर्ष का फायदा उठाने की कोशिश करता है, लेकिन लंबे समय में उसे इसका प्रभाव नकारात्मक ही रहा है।

मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा कि यह पाकिस्तान की कोई नई प्रवृत्ति नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जब ‘ग्लोबल वॉर ऑन टेरर’ शुरू हुआ था, तब पाकिस्तान ने खुद को उसमें शामिल कर लिया और अमेरिका का साथ दिया। इससे पहले, जब रूस ने अफगानिस्तान में हस्तक्षेप किया था, तब भी पाकिस्तान ने खुद को एक फ्रंटलाइन स्टेट के रूप में पेश किया और अमेरिका के साथ खड़ा हुआ।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की यह नीति हमेशा से रही है कि वह अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में अवसर तलाशने और अपने हित साधने की कोशिश करे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर इन कदमों के दीर्घकालिक प्रभाव को देखा जाए, तो पाकिस्तान को अक्सर नकारात्मक परिणाम ही मिले हैं।

नरवणे ने मौजूदा वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान जैसे देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच भी पाकिस्तान उसी पुराने पैटर्न पर चलता नजर आ रहा है।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। नरवणे ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। इस बार हमने सिर्फ आतंकवादी ठिकानों को निशाना नहीं बनाया, बल्कि उनके नेतृत्व के मुख्यालय को भी टार्गेट किया। यह पहले के ऑपरेशनों से अलग था। इसलिए रक्षा मंत्री ने भी कहा था कि हम ‘घर में घुसकर मारेंगे’। मुझे लगता है कि इससे पाकिस्तान को बहुत बड़ा संदेश मिला है कि अगर वह इस तरह की हरकत करेगा, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।