राघव चड्ढा के आप छोड़ने पर अनुराग ढांडा बोले-अच्छा हुआ गद्दार चले गए, भाजपा भी नहीं कर पाएगी स्वीकार

0
5

नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया इंचार्ज अनुराग ढांडा ने राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा के भाजपा में शामिल होने पर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने शनिवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मौजूदा समय में भाजपा के लोग आम आदमी पार्टी से डरी हुई है। खासकर जिस तरह की स्थिति गुजरात में आम आदमी की बनी हुई है, उससे भाजपा के लोग घबराए हुए हैं। इसी वजह से भाजपा आप के सभी नेताओं को ईडी सहित अन्य जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके परेशान करने की कोशिश कर रही है, लेकिन मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं कि देश की जनता इस तरह की स्थिति को किसी भी कीमत पर स्वीकार करने वाली नहीं है। आने वाले दिनों में भाजपा को देश की जनता की ओर से जरूर माकूल जवाब मिलेगा।

अनुराग ढांडा ने कहा कि भाजपा अब सिर्फ हमारे नेताओं को परेशान करने तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि अब वो गुजरात में हमारी पार्टी के इंस्टाग्राम हैंडल और हमारे समर्थकों के सोशल मीडिया हैंडल को बंद करा रही है, ताकि हम विस्तारित होने से रोका जा सके। इस तरह से देखें तो भाजपा के लोग आम आदमी पार्टी की अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने की कोशिश कर रही है। ये लोग हमारी आवाज को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा के लोग नहीं चाहते हैं कि आम आदमी पार्टी देशहित में अपनी आवाज उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आम आदमी पार्टी को खत्म करने की कोशिश कर रही है। इसकी पूरी साजिश भाजपा की ओर से रची जा चुकी है जिसे जल्द ही धरातल पर उतारने की ये लोग कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं कि हमारे नेता अरविंद केजरीवाल ने जिस तरह से देश की जनता को बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधा देने का संकल्प लिया है, उस संकल्प को धरातल पर उतरने से कोई नहीं रोक सकता।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा हमारे सोशल मीडिया हैंडल को जितना मर्जी चाहे, उतना ब्लाक करें, जितनी साजिशें धरातल पर उतारें, लेकिन मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं कि आम आदमी पार्टी को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। हमारी यह पार्टी इसी तरह से आगे बढ़ती रहेगी।

इसके अलावा, अनुराग ढांडा ने राघव चड्ढा की ओर से आम आदमी पार्टी पर लगाए गए आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह के पास भी अंग्रेजों के शासनकाल में समझौता करने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने समझौता करने की जगह संघर्ष करने विकल्प चुना और यही कारण है कि आज की तारीख में पूरा देश उन्हें याद करता है। देश कभी गद्दारी करने वाले लोगों को याद नहीं करता है। देश हमेशा से ही उन लोगों को याद करता है, जो संघर्ष का रास्ता चुनते हैं।

उन्होंने कहा कि राघव चड्ढा जब पंजाब में जाएंगे, तो उन्हें वहां के लोग कड़ा सबक सिखाएंगे, क्योंकि पंजाब के लोग सब कुछ बर्दाश्त कर सकते हैं, लेकिन, गद्दारी कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते। पंजाब के लोग राघव चड्ढा जैसे गद्दारों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।

उन्होंने दावा किया कि राघव चड्ढा की दिल्ली में भी सदस्यता जाएगी और मुझे पूरा विश्वास है कि पंजाब में भी इनका बुरा हश्र होगा। इनके हालात आने वाले दिनों में बुरे ही होने वाले हैं, क्योंकि पंजाब की जनता सब कुछ बर्दाश्त कर सकती है, लेकिन गद्दारी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त करने वाली नहीं है। मैं आम आदमी पार्टी को लेकर एक बात साफ कर देना चाहता हूं कि गद्दारों के जाने से अब हमारी पार्टी और ज्यादा मजबूत होगी। अब हमारी पार्टी सिर्फ क्रांतिकारियों और ईमानदारों की टोली है, जो सिर्फ हमारी पार्टी को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे। इस दिशा में हमारी पार्टी के लोग किसी भी प्रकार का समझौता करने वाले नहीं हैं। हम लोग कुछ भी बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन, गद्दारी को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकते। अब हमारी पार्टी में नए लोगों को मौका मिलेगा। मैं तो कहूंगा कि ये अच्छा हुआ कि गद्दार चले गए।

वहीं, अनुराग ढांडा ने अशोक मित्तल को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि 10 दिन पहले ही अशोक मित्तल के यहां पर ईडी की छापेमारी होती है। इसके बाद वो पार्टी छोड देते हैं। क्या इससे यह साफ जाहिर नहीं होता है कि मौजूदा समय में किस तरह से लोगों को ईडी का डर दिखाया जा रहा है। जब अशोक मित्तल के यहां पर छापेमारी हुई थी, तब हमने दावा किया था कि राघव चड्ढा की शह पर यह रेड कराई गई है। यह साजिश हमारे सांसदों को तोड़ने की कोशिश की थी जिसे वे धरातल पर उतारने में सफल रहे। अब तो देश की जनता ने भी देख लिया कि किस तरह से भाजपा के लोग दूसरी पार्टियों को तोड़ने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने कहा कि जितने भी लोगों ने आम आदमी पार्टी को छोड़ा है, उनका कोई जनाधार नहीं था। सच्चाई यह है कि पार्टी ने उन्हें वहां पर भेजा था। अगर सिद्धांतों के आधार पर ये लोग पार्टी छोड़ रहे हैं, तो सबसे पहले इन्हें राज्यसभा की सदस्यता छोड़नी चाहिए। इसके बाद किसी पार्टी में जाना चाहिए। खैर, जिस तरह से ये लोग भाजपा में शामिल हुए, उससे मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं कि भाजपा भी इन लोगों को स्वीकार नहीं कर पाएगी।