केजरीवाल का सत्याग्रह हास्यास्पद और न्यायपालिका के खिलाफ: पवन बंसल

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चंडीगढ़, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। पूर्व सांसद पवन बंसल ने अरविंद केजरीवाल के सत्याग्रह, गुजरात चुनाव परिणाम और पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति पर आईएएनएस से बातचीत करते हुए अपनी राय व्यक्त की।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को लिखे पत्र और ‘सत्याग्रह’ पर कांग्रेस नेता पवन कुमार बंसल ने कहा, “मुझे यह हास्यास्पद और पूरी तरह से बेतुका लगता है। यह न्यायपालिका के खिलाफ है। केजरीवाल खुद को आम लोगों से ऊपर समझते हैं, और उनकी पार्टी ने सिविल सोसायटी आंदोलन का राजनीतिक फायदा उठाया है। आप यह तय नहीं कर सकते कि कौन से जज आपके केस की सुनवाई करेंगे। यह काम मुख्य न्यायाधीश का होता है। अगर जज चुनने की आजादी मिलने लगेगी तो देश में अफरातफरी का माहौल हो जाएगा। इतिहास में पहली बार ऐसा किसी आरोपी ने अपने केस के लिए जज चुनने की मांग की होगी।”

पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर पवन बंसल ने कहा, भाजपा जीतने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रही है। भाजपा की कोशिश है कि केंद्र और सभी राज्यों में उनकी ही सरकार बने और उसके बाद अपने अनुसार संविधान बना सकें। इसका उदाहरण आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसद हैं, जिनको भाजपा ने विलय करा लिया। यह एक तरह का संविधान पर हमला है। ये कानून भी सही नहीं है। इस मामले में राज्यसभा सभापति का फैसला मेरे अनुसार गलत है। आम आदमी पार्टी को इस मामले को अदालत में चुनौती देना चाहिए। इस मामले में राष्ट्रपति की कोई भूमिका नहीं हो सकती है।”

मोहन भागवत के ‘हिंदू राष्ट्र’ संबंधी बयान पर बंसल ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और इसकी विविधता ही इसकी ताकत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि देश में धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बनाए रखते हुए बेहतर शासन पर ध्यान दिया जाए।

इसके पहले पवन बंसल ने कहा था, “आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्यों का इस तरह पार्टी छोड़ना अनैतिक है। आम धारणा यह है कि आप एक पार्टी नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल एक खास माहौल बनाने के लिए किया गया था, जिसे भाजपा उस समय आकार दे रही थी।”