भारत में एआई इमेज टूल का बढ़ता क्रेज, चैटजीपीटी इमेज 2.0 के सबसे बड़े यूजर बने भारतीय

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    नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। ओपेनएआई द्वारा चैटजीपीटी इमेज 2.0 लॉन्च करने के सिर्फ एक हफ्ते के अंदर ही भारत इसके सबसे बड़े यूजर बेस के रूप में सामने आया है। गुरुवार को यह जानकारी सामने आई है।

    लेकिन आंकड़ों से परे, जो बात सबसे अलग दिखती है, वह यह कि भारत के लोग इस एआई टूल का इस्तेमाल नए तरीके से कर रहे हैं — इसे क्रिएटिविटी, पहचान और डिजिटल स्टोरीटेलिंग के लिए उपयोग किया जा रहा है।

    जहां पहले एआई को सिर्फ काम आसान करने वाला टूल माना जाता था, वहीं अब भारत में लोग इसे अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बना रहे हैं।

    भारत के यूजर्स एनीमे स्टाइल पोर्ट्रेट, सिनेमैटिक फोटो, फैंटेसी न्यूजपेपर कवर और टैरो कार्ड जैसी इमेज बना रहे हैं। खासकर युवा वर्ग इसे अपनी स्टाइल और पहचान दिखाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

    इसकी लोकप्रियता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि चैटजीपीटी इमेज 2.0 में नई तकनीक जोड़ी गई है। यह कम शब्दों में भी डिटेल वाली इमेज बना सकता है, सही टेक्स्ट लिख सकता है (कई भाषाओं में), और जटिल निर्देशों को भी समझ सकता है।

    इसमें सोचने-समझने की क्षमता भी जोड़ी गई है, जिससे यह यूजर के निर्देशों को बेहतर तरीके से समझकर अलग-अलग विकल्प दे सकता है और जरूरत पड़ने पर इंटरनेट की जानकारी का उपयोग भी कर सकता है।

    लेकिन असली कहानी इस बात में छिपी है कि लोग इसका इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं। भारत यूजर्स इस टूल की सीमाओं को आगे बढ़ा रहे है, और इससे प्रोफेशनल फोटो, लिंक्डइन स्टाइल हेडशॉट, पैपराजी से प्रेरित ‘फ्लैश’ फोटो से लेकर मनमोहक पेस्टल ‘स्प्रिंग’ सौंदर्य और फैशन-केंद्रित ‘स्टाइल मी’ रूपांतरण तक सब कुछ बना रहे हैं।

    रोजमर्रा की तस्वीरों को भी लोग इसमें बदलकर शानदार लुक दे रहे हैं, और पुरानी या खराब फोटो को भी बेहतर बना रहे हैं।

    कुछ लोग इससे अलग तरह के प्रयोग भी कर रहे हैं, जैसे खुद को अखबार के पहले पेज पर दिखाना, टैरो कार्ड इमेज बनाना या भविष्य के घर और डिजाइन तैयार करना।

    इसके अलावा भारत में खास ट्रेंड भी देखने को मिल रहे हैं, जैसे फिल्मी पोट्रेट कोलाज और पुराने (वाई2के) स्टाइल के रोमांटिक एडिट।

    यह बदलाव दिखाता है कि अब एआई टूल्स सिर्फ तकनीकी काम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत में यह सोशल मीडिया, फैशन, फैन कल्चर और पर्सनल पहचान का हिस्सा बन चुके हैं।