नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव ने गुरुवार को बैंकों को निर्देश दिया कि वे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विकसित ‘म्यूलहंटर डॉट एआई’ टूल को जल्द से जल्द अपनाएं ताकि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी में शामिल फर्जी खातों की समय पर पहचान की जा सके और उन्हें रोका जा सके।
सचिव ने हैदराबाद के पुलिस आयुक्त और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, केंद्रीय जांच ब्यूरो, भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय डिजिटल भुगतान अवसंरचना कंपनी और बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराधियों द्वारा फर्जी खातों के बढ़ते उपयोग की समीक्षा की गई।
हाल ही में हैदराबाद पुलिस द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ और उससे प्राप्त सीखों पर चर्चा केंद्रित रही। डीएफएस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि साइबर-आधारित वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने और ग्राहक सुरक्षा बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयासों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
बैठक में ऑपरेशन ऑक्टोपस के तहत डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी का पता लगाने और उसे रोकने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों और बैंकों के बीच घनिष्ठ सहयोग, वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने, और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र पर बल दिया गया। डीएफएस सचिव ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों को बैंकों द्वारा साइबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में राज्य पुलिस अधिकारियों को जागरूक करने और व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाने की सलाह दी।
इसी बीच, हैदराबाद पुलिस आयुक्त वीसी. सज्जनार ने बताया कि डीएफएस सचिव ने नई दिल्ली में अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें वे स्वयं भी शामिल थे। इस बैठक में हैदराबाद पुलिस द्वारा ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ के तहत चलाए गए फर्जी खातों पर हालिया कार्रवाई की समीक्षा की गई।
आयुक्त ने बताया कि चर्चा का केंद्र बिंदु ऑपरेशन से प्राप्त प्रमुख सीख थीं, जिसमें साइबर-आधारित वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने और ग्राहक सुरक्षा बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयासों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
सज्जनार ने पिछले सप्ताह बैंकिंग प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलावों का सुझाव देते हुए कहा था कि देश भर में सक्रिय संगठित गिरोहों को खत्म करने के लिए ऐसे सुधार अनिवार्य हैं।

