सूरत, 1 मई (आईएएनएस)। भारत में सड़क यात्रा को और तेज, आसान और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुंबई-दिल्ली नेशनल हाईवे (एनएच48) पर सूरत के पास स्थित चोर्यासी टोल प्लाजा देश का पहला ऐसा टोल प्लाजा बन गया है, जहां वाहनों को रुकना नहीं पड़ेगा। यानी अब गाड़ियों को टोल पर ब्रेक लगाने या लाइन में खड़े रहने की जरूरत नहीं होगी।
यह टोल प्लाजा सूरत और भरूच के बीच कामरेज–चोर्यासी सेक्शन पर स्थित है और करीब दो महीने के ट्रायल के बाद इसे पूरी तरह शुरू किया गया है। इस सिस्टम की खास बात यह है कि यह पूरी तरह बैरियर-फ्री है, यानी यहां कोई फिजिकल बैरियर या गेट नहीं है जो गाड़ियों को रोक सके।
इस नई व्यवस्था में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। इसे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने लागू किया है और यह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की आधुनिक टोलिंग योजना का हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य है कि 2026 के अंत तक देश के 1,050 से ज्यादा टोल प्लाजा को इसी तरह के स्मार्ट और ऑटोमेटेड सिस्टम में बदल दिया जाए।
इस सिस्टम में टोल वसूली पूरी तरह ऑटोमेटिक होती है। जैसे ही कोई वाहन टोल प्लाजा से गुजरता है, ओवरहेड गैन्ट्री पर लगे हाई-रेजोल्यूशन कैमरे उसकी नंबर प्लेट को स्कैन कर लेते हैं। साथ ही फास्टैग से जुड़े आरएफआईडी सेंसर भी वाहन की जानकारी पढ़ लेते हैं। इसके बाद टोल राशि सीधे वाहन मालिक के बैंक खाते से कट जाती है। इसमें न तो किसी कर्मचारी को पैसे देने की जरूरत होती है और न ही वाहन को रुकना पड़ता है।
अगर किसी वाहन में फास्टैग नहीं है, तो भी सिस्टम उसकी नंबर प्लेट से पहचान कर लेता है और वाहन मालिक के रजिस्टर्ड नंबर पर ई-नोटिस भेज दिया जाता है, जिसमें भुगतान की जानकारी होती है।
एनएचएआई के मुख्य परिचालन अधिकारी, एआर चित्रांसी ने बताया कि यह सिस्टम पूरी तरह से बाधारहित है। इसमें वाहन को रोकने की कोई जरूरत नहीं है। वाहन सीधे टोल गैन्ट्री के नीचे से गुजर जाएगा और टोल अपने आप कट जाएगा। इस तकनीक से गाड़ियों की आवाजाही काफी तेज हो गई है। अब वाहन 80 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से भी बिना रुके टोल पार कर सकते हैं। इससे हाईवे पर लगने वाले लंबे जाम और ट्रैफिक की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी, खासकर उन रूट्स पर जहां पहले टोल पर भारी भीड़ लगती थी।
इस सिस्टम से न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन की भी बचत होगी। अनुमान है कि हर साल करीब 1,500 करोड़ रुपये का फ्यूल बचाया जा सकता है क्योंकि अब गाड़ियों को रुक-रुककर चलना नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही टोल वसूली में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने से करीब 6,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व भी मिल सकता है।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत 2026 के अंत तक पूरी तरह बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम की ओर बढ़ रहा है। सूरत का यह प्रोजेक्ट उसी दिशा में एक पायलट मॉडल माना जा रहा है, जिसे आगे देशभर में लागू किया जाएगा।

