जापान के सुरक्षा बदलावों की कोश‍िशों को उत्तर कोरिया ने बताया शांति के लिए खतरा

0
9

प्योंगयांग, 4 मई (आईएएनएस)। उत्तर कोरिया ने सोमवार को जापान की सुरक्षा से जुड़े बड़े कानूनों में बदलाव की कोशिश की आलोचना की और इसे ‘दुनिया की शांति और इंसानियत के लिए खुली चुनौती’ बताया।

जापान इस साल अपने तीन अहम सुरक्षा दस्तावेज नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी, नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी और डिफेंस बिल्डअप प्रोग्राम को अपडेट करने की कोशिश कर रहा है।

योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा माना जा रहा है कि यह कदम चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और इलाके में बढ़ते सुरक्षा खतरों के जवाब में उठाया जा रहा है।

उत्तर कोरिया के सरकारी अखबार रोडोंग सिनमुन में छपे एक लेख में कहा गया कि यह जापान की ‘चालाक साजि‍श’ है, जिससे वह ‘दुनिया में बढ़ते तनाव के बीच फिर से हमला करने की अपनी पुरानी मंशा’ को पूरा करना चाहता है।

लेख में कहा गया कि इन बदलावों में रक्षा बजट बढ़ाना, हथियारों के निर्यात पर लगी रोक हटाना और सेना की ताकत बढ़ाना शामिल है। उनका कहना है कि ये कदम ‘जापान के हथियार उद्योग को फिर से खड़ा करने और उसकी युद्ध क्षमता बढ़ाने’ के लिए हैं।

पिछले महीने जापान सरकार ने रक्षा उपकरण और तकनीक के ट्रांसफर से जुड़े नियमों में बदलाव किया, जिससे अब वह घातक हथियारों समेत कई तरह के हथियार विदेशों में बेच सकेगा। इस फैसले के खिलाफ वहां बड़े पैमाने पर विरोध भी हुआ।

पहले जापान सिर्फ पांच तरह के गैर-लड़ाकू उपकरण जैसे बचाव, ट्रांसपोर्ट, चेतावनी, निगरानी और माइन हटाने वाले सामान ही निर्यात कर सकता था।

अब नए नियमों में उपकरणों को दो हिस्सों में बांटा गया है ‘हथियार’ और ‘गैर-हथियार’, इस आधार पर कि उनमें नुकसान पहुंचाने की क्षमता है या नहीं।

गैर-हथियार जैसे रडार सिस्टम का निर्यात पहले की तरह जारी रहेगा, लेकिन अब जापान उन देशों को हथियार भी बेच सकेगा जिनके साथ उसका रक्षा जानकारी की सुरक्षा को लेकर समझौता है। इसमें मिसाइल और युद्धपोत जैसे हथियार भी शामिल हैं, जिनकी पहले इजाजत नहीं थी।

अक्टूबर 2025 में जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा था कि वह देश की सैन्य ताकत को और तेजी से बढ़ाना चाहती हैं। उन्होंने मार्च 2026 तक रक्षा बजट को जीडीपी का दो प्रत‍िशत तक ले जाने और 2026 के अंत तक सुरक्षा से जुड़े तीनों बड़े दस्तावेजों को अपडेट करने का वादा किया था।