Monday, August 24, 2026
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निगरानी, संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की मजबूती के लिए 1,476 करोड़ रुपए का करार

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नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूती देते हुए रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को एक बड़ा रक्षा सौदा किया। यह रक्षा सौदा भारतीय सेना के लिए किया गया है। इस सौदे के तहत रक्षा मंत्रालय ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) हैदराबाद के साथ 1,476 करोड़ रुपए का अनुबंध किया है। इस खरीद से भारतीय सेना का निगरानी व संचार तंत्र और मजबूत होगा। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में भी इससे मदद मिल सकती है।

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ यह अनुबंध पांच ग्राउंड-बेस्ड मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की खरीद के लिए किया गया है। रक्षा मंत्रालय की इस डील में कम से कम 72 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री शामिल होगी। यह स्वदेशी सामग्री देश में रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रही है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह करार ‘बाय (इंडियन–इंडिजेनसली डिजाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड)’ श्रेणी के तहत किया गया है। अनुबंध पर हस्ताक्षर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 (रक्षा मंत्रालय) में किए गए।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के शामिल होने से भारतीय सेना की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा। खास तौर पर यह सिस्टम सेना की निगरानी, संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं को मजबूत करेंगे। इस सौदे से भारतीय सेना को तकनीकी बढ़त को मिलेगी ही, वहीं दूसरी ओर देश के स्वदेशी रक्षा उद्योग को भी मजबूती मिलेगी। इससे घरेलू कंपनियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और सप्लाई चेन को नए अवसर मिलेंगे।

सरकार का मानना है कि यह करार ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को गति देगा। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण पर लगातार जोर दिया गया है, और यह अनुबंध उसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे प्रोजेक्ट्स भारत को रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बना रहे हैं। इससे कुछ दिन पहले ही भारत के अग्रणी युद्धक टैंकों टी-72 और टी-90 टैंकों से जुड़ा एक बड़ा रक्षा सौदा भी किया गया था।

इस सौदे के तहत लगभग 975 करोड़ रुपए की लागत से टी-72 और टी-90 टैंकों के ट्रॉल असेंबली की खरीद का निर्णय लिया गया। ट्रॉल असेंबली, युद्ध के दौरान बारूदी सुरंगों (माइनफील्ड) को पार करने में सेना को और अधिक सशक्त बनाएगी।

गौरतलब है कि ट्रॉल, टैंकों के सामने आने वाली बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय कर देता है। यह टैंक के लिए एक सुरक्षित रास्ता बनता है। यह रक्षा सौदा भी आत्मनिर्भर भारत को मजबूती देते हुए किया गया था। इसके लिए लगभग 975 करोड़ रुपये के महत्वपूर्ण रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर किए। ये अनुबंध टी-72 और टी-90 टैंकों के लिए ट्रॉल असेंबली की खरीद से जुड़े थे।

दरअसल, ट्रॉल असेंबली एक अत्यंत महत्वपूर्ण सैन्य उपकरण है। इसे भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है। यह खास उपकरण टैंकों के आगे लगाया जाता है। इसका काम माइनफील्ड में सुरक्षित रास्ता बनाना होता है। विशेष रूप से यह एंटी-टैंक माइन, जिनमें प्रॉक्सिमिटी मैग्नेटिक फ्यूज लगे होते हैं, उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इससे युद्ध के दौरान टैंकों और अन्य सैन्य वाहनों के लिए सुरक्षित मार्ग तैयार किया जा सकेगा।