चेन्नई, 5 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में तीसरे स्थान पर रहने के बाद ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) ने अपनी आगे की रणनीति तय करने के लिए बुधवार को नव-निर्वाचित विधायकों की पहली बैठक बुलाने का फैसला किया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार यह बैठक संगठन के पुनर्निर्माण और भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
बुधवार को होने वाली इस बैठक में राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा के साथ-साथ तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के तेजी से उभार का मुकाबला करने की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही, संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए तैयार रहने की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
अन्नाद्रमुक ने फिलहाल स्पष्ट कर दिया है कि वह टीवीके द्वारा संभावित रूप से बनाई जाने वाली किसी भी सरकार को समर्थन नहीं देगी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ अपने रुख पर कायम रहेगी। राज्य में त्रिशंकु जनादेश के बाद बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच यह रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चुनावी झटके के बावजूद पार्टी के आंतरिक आकलन में यह सामने आया है कि उसका कोर वोट बैंक अभी भी मजबूत बना हुआ है। करीब 27 प्रतिशत वोट शेयर और एक करोड़ से अधिक मत हासिल करने को नेतृत्व सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है, हालांकि संगठनात्मक कमियों और जमीनी स्तर पर संपर्क बढ़ाने की जरूरत को भी स्वीकार किया गया है।
बैठक में युवाओं, खासकर जेन-जी मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने पर भी जोर रहेगा। टीवीके की सफलता ने युवा मतदाताओं के महत्व को उजागर किया है, जिसके चलते पार्टी युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने और युवाओं के लिए अलग ढांचा तैयार करने पर विचार कर सकती है।
इसके अलावा अनुसूचित जाति समुदायों के साथ संबंधों को फिर से मजबूत करना भी पार्टी की प्राथमिकता में शामिल है। इन वर्गों को अन्नाद्रमुक के पारंपरिक समर्थन आधार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता रहा है।
बुधवार की यह बैठक अन्नाद्रमुक के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है, जिसमें पार्टी तत्काल राजनीतिक रणनीति के साथ-साथ दीर्घकालिक पुनरुत्थान की दिशा में कदम तय करेगी।

