तनाव को कहें गुडबाय, गर्भावस्था में हर दिन करें प्राणायाम

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नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। गर्भावस्था हर महिला के जीवन का एक बहुत खास और खूबसूरत समय होता है, लेकिन इस दौरान शरीर और मन दोनों में कई बदलाव आते हैं। कभी हार्मोनल बदलाव की वजह से मूड स्विंग्स होते हैं, तो कभी शरीर में थकान और भारीपन महसूस होता है। ऐसे में थोड़ा-बहुत तनाव होना आम बात है। इस दौरान रोजाना प्राणायाम करना फायदेमंद हो सकता है।

प्राणायाम का मतलब है सांसों को सही तरीके से नियंत्रित करना। यह सुनने में जितना आसान लगता है, इसका असर उतना ही गहरा होता है। जब आप धीरे-धीरे और गहरी सांस लेते हैं, तो दिमाग शांत होता है, शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है और अंदर से एक अलग ही सुकून महसूस होता है।

आयुष मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर बताया कि गर्भावस्था के दौरान प्राणायाम और भी ज्यादा फायदेमंद हो जाता है, क्योंकि इससे मां और बच्चे दोनों को लाभ मिलता है। इसमें नाड़ी शोधन प्राणायाम को सबसे अच्छा माना जाता है। इसमें एक नाक से सांस ली जाती है और दूसरी नाक से छोड़ी जाती है। इसे करने से मन शांत होता है और तनाव कम होता है। रोज कुछ मिनट अभ्यास करने से ही फर्क महसूस होने लगता है।

इसके अलावा, शीतली प्राणायाम भी बहुत उपयोगी है। इसमें जीभ को ट्यूब की तरह मोड़कर सांस अंदर ली जाती है और नाक से छोड़ी जाती है, जिससे शरीर का तापमान कम होता है। खासकर गर्मी और बेचैनी के समय यह काफी राहत देता है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह काफी आरामदायक माना जाता है।

भ्रामरी प्राणायाम भी बहुत असरदार है। इसमें सांस छोड़ते समय मधुमक्खी की तरह गुंजन की आवाज निकाली जाती है। यह दिमाग को शांत करता है, चिंता कम करता है और नींद को भी बेहतर बनाने में मदद करता है। कई बार जब मन बहुत ज्यादा बेचैन हो, तब यह प्राणायाम तुरंत सुकून देता है।

सबसे अच्छी बात यह है कि इन सभी प्राणायामों को करने के लिए ज्यादा समय या किसी भारी-भरकम तैयारी की जरूरत नहीं होती। आप सुबह उठकर या शाम को कुछ समय निकालकर सिर्फ 10-15 मिनट भी अभ्यास करें, तो काफी फायदा मिल सकता है।

गर्भावस्था में सबसे जरूरी चीज मानसिक शांति होती है, क्योंकि मां का तनाव बच्चे पर भी असर डाल सकता है। इसलिए जरूरी है कि महिला खुद को खुश और रिलैक्स रखने की कोशिश करे। प्राणायाम इसमें एक बड़ा सहारा बन सकता है। इसके साथ ही हल्की वॉक, पौष्टिक भोजन और पर्याप्त आराम भी बहुत जरूरी है।

हालांकि, गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार का योग या प्राणायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।