पाकिस्तान में अफगान प्रवासियों से वसूली और जबरन बेदखली के आरोप: रिपोर्ट

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काबुल, 8 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान से अफगानिस्तान लौट रहे अफगान प्रवासियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पाकिस्तानी पुलिसकर्मियों द्वारा वसूली और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय मीडिया की एक रिपोर्ट में शुक्रवार को यह दावा किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान छोड़ने की कोशिश कर रहे कई प्रवासियों को रास्ते में कई बार रोका गया और उनसे जबरन पैसे वसूले गए।

अफगान मीडिया आउटलेट अमु टीवी ने पूर्वी अफगानिस्तान के स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया कि खासतौर पर व्यस्त तोरखम सीमा चौकी पर पाकिस्तानी पुलिसकर्मी प्रवासियों से पैसे मांग रहे थे और इसके लिए बल या धमकी का इस्तेमाल भी किया जा रहा था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पाकिस्तानी प्रशासन ने अफगान परिवारों पर दबाव बढ़ा दिया है। जिन घरों को उन्होंने वर्षों में बनाया था, उन्हें तोड़कर जल्द से जल्द अफगानिस्तान लौटने के लिए कहा जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, “पाकिस्तानी अधिकारियों ने प्रवासियों को अपने घर खुद ध्वस्त करने और जल्द से जल्द अफगानिस्तान लौटने का निर्देश दिया है।”

हालांकि, जबरन वसूली और घर तोड़ने के आरोपों पर पाकिस्तान की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इस बीच इस्लामाबाद लगातार तालिबान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकियों को शरण देने का आरोप लगाता रहा है। पिछले छह महीनों में दोनों पक्षों के बीच तनाव काफी बढ़ा है।

तालिबान ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी अन्य देश पर हमला करने के लिए नहीं होने दिया जाता।

तनाव के दौरान सीमा पर झड़पें और हवाई हमले भी हुए हैं।

रिपोर्ट में विश्लेषकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के हवाले से कहा गया कि “अफगान प्रवासी इस्लामाबाद और तालिबान के बीच राजनीतिक और सुरक्षा विवाद का खामियाजा भुगत रहे हैं।”

यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब कतर और तुर्किये की मध्यस्थता में कई दौर की वार्ताएं भी हो चुकी हैं।

सीमा पर तनाव के कारण व्यापारिक मार्गों और बॉर्डर क्रॉसिंग को भी समय-समय पर बंद करना पड़ा है।

तालिबान संचालित प्रवासी मामलों के आयोग के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान विभिन्न बहानों से तोरखम सीमा पर लौट रहे अफगानों को जानबूझकर रोके हुए है।

रिपोर्ट में सहायता एजेंसियों के हवाले से चेतावनी दी गई है कि बड़ी संख्या में लौट रहे लोग बेहद कम सामान, सीमित आर्थिक संसाधनों और अनिश्चित भविष्य के साथ अफगानिस्तान पहुंच रहे हैं, जहां पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट और मानवीय आपदा जैसी स्थिति बनी हुई है।