भारत-सूरीनाम साझेदारी कृषि, विकास और सहयोग की नई पहल : एस. जयशंकर

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नई द‍िल्‍ली, 8 मई (आईएएनएस)। सूरीनाम देश के दौरे के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम के बाद प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्‍होंने कहा क‍ि हम सब यहां भारत और सूरीनाम के बीच सहयोग और दोस्ती के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के गवाह बनने के लिए एकत्र हुए हैं।

मंत्री ने कहा क‍ि सुबह आप सभी के साथ इस महत्वपूर्ण हस्तांतरण समारोह में शामिल होकर मुझे सच में बहुत खुशी हो रही है। मीड‍िया के सवालों में भारत की कृषि‍ यात्रा का ज‍िक्र करते हुए उन्‍होंने कहा क‍ि पिछले दस वर्षों में भारत की कृषि यात्रा को नीतियों का समर्थन, संसाधनों का सहयोग, तकनीक का इस्तेमाल और सबसे बढ़कर वैल्यू एडिशन ने आगे बढ़ाया है। यह कृषि यात्रा सिर्फ खाद्य और आर्थिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सबको साथ लेकर विकास करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। आज मैं इसी संदेश को दोहराना चाहता हूं, जब हम यहां सूरीनाम के फूड प्रोसेसिंग उद्योग से जुड़े इस बेहद महत्वपूर्ण माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को सौंपने के लिए एकत्र हुए हैं।

जयशंकर ने बताया क‍ि कुछ साल पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ग्लोबल साउथ के प्रति दृष्टिकोण से प्रेरित होकर और भारत-कोफकोर मंत्रीस्तरीय बैठक में हुई चर्चाओं के बाद, हमने इस तरह के प्रोजेक्ट पर सहमति बनाई थी। आज सूरीनाम में उपस्थित होकर इस परियोजना के हस्तांतरण का हिस्सा बनना मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत संतोष की बात है। हम पूरी तरह समझते हैं कि जब हमारे कैरीकॉम साझेदार देशों को ऐसे प्रोजेक्ट्स की पेशकश की गई, तब सूरीनाम ने फल प्रसंस्करण इकाई को अपनी प्राथमिकता के रूप में चुना और इस प्लांट के लिए इस जगह का चयन किया। हम इसकी सराहना करते हैं कि इसका उद्देश्य स्थानीय उद्यमों को प्रबंधन सीखने, अनुभव हासिल करने और वह वैल्यू एडिशन विकसित करने में मदद करना है, जिसका आपने भी जिक्र किया। यह स्थानीय किसानों के लिए नए अवसर पैदा करेगा और ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाएगा।

जयशंकर ने कहा क‍ि मुझे पता चला है कि आपकी सरकार ने प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए पैशन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने की कोशिश की है। यह जानकर भी खुशी हुई कि यह मशीनरी भविष्य में दूसरे फलों के लिए भी इस्तेमाल की जा सकेगी। हम यहां एक खास क्षेत्र की एक विशेष परियोजना की बात कर रहे हैं, लेकिन मेरा मानना है कि यह परियोजना भारत और सूरीनाम के साथ-साथ पूरे ग्लोबल साउथ के साथ भारत की साझेदारी का एक बड़ा संदेश भी देती है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सोच के प्रति हमारी प्रतिबद्धता सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं है। यह खास परियोजनाओं और ठोस कामों के जरिए भी दिखाई देती है और मुझे लगता है कि यह उसका बहुत अच्छा उदाहरण है।

उन्‍होंने कहा क‍ि हमारा सहयोग हमेशा लोगों को केंद्र में रखकर किया गया है। अगर आप पिछले कुछ वर्षों में हमारे संबंधों को देखें, तो पाएंगे कि इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ा है। हमारी हाल की कुछ पहलों में खाद्यान्न की आपूर्ति, सैन्य वर्दियों का दान, क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स और आपदा तैयारी के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम शामिल हैं। ये सभी कदम इस बात का संदेश देते हैं कि सच्ची दोस्ती आखिरकार लोगों की जिंदगी में बदलाव लानी चाहिए। पिछले कई दशकों में सूरीनाम सरकार ने भारत की लाइन ऑफ क्रेडिट सुविधाओं का लाभ उठाया है। हमारी बातचीत में हमने इस संभावना पर भी चर्चा की कि आने वाले समय में आपकी सरकार की प्राथमिकताओं के अनुसार इस सहयोग को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।