नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने महज तीन साल में 1,000 किलोमीटर सुरक्षित क्वांटम संचार का लक्ष्य पूरा कर लिया है। यह उपलब्धि तय समयसीमा से आधे से भी कम समय में हासिल की गई है।
उन्होंने कहा कि भारत क्वांटम, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर और डीप-टेक जैसी उभरती तकनीकों में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। साथ ही देश के युवा वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार उच्च शिक्षा को नई तकनीकों के अनुरूप बनाने पर काम कर रही है, जिसमें एआई, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कौशल विकास निगम, एथनोटेक और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस एंड असेसमेंट के सहयोग से विकसित केंद्र छात्रों को भविष्य की नौ तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण देगा। इसके साथ ही छात्रों को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र भी दिए जाएंगे।
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन की प्रगति का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि आठ वर्षीय इस मिशन पर तेजी से काम चल रहा है। देश भर के संस्थानों के सहयोग से चार प्रमुख थीम आधारित हब बनाए गए हैं, जो इस मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सिर्फ तीन साल में 1,000 किलोमीटर सुरक्षित क्वांटम संचार नेटवर्क तैयार होना भारत की बड़ी तकनीकी उपलब्धि है।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024 में शुरू किए गए इंडिया एआई मिशन के जरिए कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेट, इनोवेशन और भविष्य की तकनीकी कौशल से जुड़ा मजबूत तंत्र तैयार किया जा रहा है।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि नवाचार के क्षेत्र में भारत की वैश्विक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और देश में एक लाख से अधिक पेटेंट दर्ज हो चुके हैं। इनमें ज्यादातर पेटेंट भारतीय नागरिकों द्वारा दाखिल किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोध प्रकाशनों के मामले में भी भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है और भारतीय शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार मान्यता मिल रही है।
मंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक के दौर में लगातार नई स्किल सीखना और खुद को अपडेट करना बेहद जरूरी हो गया है। खासकर एआई, साइबर सुरक्षा, क्वांटम तकनीक और सेमीकंडक्टर डिजाइन जैसे क्षेत्रों में यह आवश्यकता और बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि भारत की लगभग 70 प्रतिशत आबादी 40 वर्ष से कम आयु की है, जो आने वाले दो से तीन दशकों में भारत को दुनिया का बड़ा कुशल कार्यबल केंद्र बना सकती है।

