बिहार: मुंगेर आयुक्त ने की संभावित बाढ़ पूर्व तैयारियों की समीक्षा, 24 गांवों पर विशेष नजर

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शेखपुरा, 9 मई (आईएएनएस)। आगामी मानसून और संभावित बाढ़ की चुनौतियों से निपटने के लिए शनिवार को मुंगेर प्रमंडल के आयुक्त प्रेम सिंह मीणा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से संपन्न हुई।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रमंडल के विभिन्न जिलों, विशेषकर लखीसराय, शेखपुरा जिला अंतर्गत बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जिला अंतर्गत कुल 6 अंचलों में से घाटकुसुम्भा अंचल बाढ़ और जलजमाव से सर्वाधिक प्रभावित होता है। यहां 5 पंचायतें और 24 राजस्व ग्राम संवेदनशील श्रेणी में हैं। कारण यह है कि गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने पर उसका पानी हरोहर नदी में प्रवेश कर जाता है, जिससे बैकवाटर की स्थिति उत्पन्न होती है।

आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में प्रायः 15 सितंबर से 15 अक्टूबर के बीच भीषण जलजमाव की स्थिति बनी रहती है। आयुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि आपदा आने का इंतजार न करें, बल्कि पूर्व तैयारी कर लें। बैठक में निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया गया। सुरक्षा एवं बचाव हेतु तटबंधों की समय रहते मरमती, गोताखोरों की प्रतिनियुक्ति और ‘खोज एवं बचाव’ दलों का तत्काल गठन करें। प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक किचन (सामुदायिक रसोई), मानवरहित शिविर और आपातकालीन सेवा केंद्रों की स्थापना करें। उनके द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मानव दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता, पशु चिकित्सा केंद्रों का संचालन और पशु चारा की व्यवस्था।

उन्होंने कहा कि खराब चापाकलों की मरमती, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति, बिजली की निर्बाध व्यवस्था और क्षतिग्रस्त सड़कों व पुल-पुलियों की सफाई व मरम्मत कराई जाय। ब्रजपात (बिजली गिरना) के आंकड़ों का ससमय प्रेषण और बाढ़ राहत सामग्रियों की निर्बाध आपूर्ति करना सुनिश्चित किया जाए। बैठक में उपस्थित अधिकारी इस महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक में शेखपुरा के जिला पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, अपर समाहर्ता, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता, और जिला आपदा पदाधिकारी सहित सभी जिला एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।