जयपुर, 9 मई (आईएएनएस)।कोटा मेडिकल कॉलेज में सीजेरियन डिलीवरी के बाद दो महिलाओं की मौत और कई अन्य मरीजों के गंभीर रूप से बीमार होने की खबरों के मद्देनजर राजस्थान सरकार ने व्यापक प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
एहतियात के तौर पर, औषधि नियंत्रण विभाग ने राज्य भर में 24 दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के उपयोग, बिक्री और वितरण पर अगले आदेश तक प्रतिबंध लगा दिया है।
प्रतिबंधित वस्तुओं में इंजेक्शन, ग्लूकोज की बोतलें, आईवी सेट, सिरिंज, कैथेटर और अन्य चिकित्सा सामग्रियां शामिल हैं जिनका उपयोग आमतौर पर सर्जरी और प्रसवोत्तर उपचार के दौरान किया जाता है।
ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम लिमिटेड (आरएमएससीएल) और राज्य भर के दवा विक्रेताओं को निर्देश जारी कर उन दवाओं और उपकरणों का उपयोग या वितरण न करने का निर्देश दिया है जिनके नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे गए हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया कि परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने तक इन दवाओं और उपकरणों का उपयोग किसी भी सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, जांच के दायरे में आए 24 दवाओं और चिकित्सा उपकरणों में से 15 को आरएमएससीएल द्वारा कोटा मेडिकल कॉलेज को आपूर्ति की गई थीं, जबकि शेष नौ को अस्पताल प्रशासन द्वारा स्थानीय स्तर पर प्राप्त किया गया था।
सभी दवाओं और उपकरणों के नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे गए हैं, और जांच पूरी होने तक इनकी आपूर्ति और उपयोग निलंबित रहेगा।
यह विवाद कोटा मेडिकल कॉलेज में दो महिलाओं की सीजेरियन ऑपरेशन के बाद मृत्यु और कई अन्य मरीजों के गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के सामने आने के बाद सामने आया।
जनता की चिंता बढ़ने पर चिकित्सा विभाग ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए।
शुरुआती जांच में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही पाई गई, जिसके बाद कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई।
डॉ. श्रद्धा उपाध्याय को इस मामले में सेवा से हटा दिया गया है। दो नर्सिंग स्टाफ सदस्यों और सर्जरी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. नवनीत कुमार को भी निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा, वार्ड प्रभारी और अन्य चिकित्सा कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

