नई दिल्ली, 26 जून (आईएएनएस)। भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने गुरुवार को कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि भारत बहुत जल्द चिकित्सा सहायता भेजेगा, क्योंकि फिलिस्तीन की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।
आईएएनएस के साथ एक इंटरव्यू में अब्दुल्ला अबू शावेश ने कहा कि गाजा में मानवीय स्थिति ‘बहुत खराब’ है। गाजा के 36 अस्पतालों में से केवल 17 ही कुछ हद तक काम कर रहे हैं। पिछले अक्टूबर में युद्धविराम की घोषणा के बाद से 1,000 से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर फिलिस्तीन के मुद्दे को हल करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने भारत के दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन और शांति प्रक्रिया में नई दिल्ली की कोशिशों का भी जिक्र किया।
सवाल: भारत से दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की फिलिस्तीन की मांग के बारे में बताएं?
जवाब : जब से इजरायली युद्ध शुरू हुआ है, भारत ने फिलिस्तीन को बड़ी मात्रा में दवाइयां और मेडिकल सामान भेजे हैं। पिछले शुक्रवार को मैंने फिलिस्तीन दूतावास में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें मैंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की थी, खासकर भारत के लोगों और भारत सरकार से कहा था कि वे फिलिस्तीनी लोगों की मदद के लिए आगे आएं। मेरी हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस फिलिस्तीन की स्वास्थ्य व्यवस्था के पूरी तरह टूट जाने को लेकर थी। उससे कुछ दिन पहले ही मेरी विदेश मंत्रालय के मंत्री के साथ अच्छी बातचीत हुई थी। उन्होंने मुझे भरोसा दिलाया कि वे अपनी पूरी कोशिश करेंगे। सच कहूं तो मुझे पूरा विश्वास है कि भारत सरकार बहुत जल्द कुछ बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाएगी। मुझे दो दिन पहले विदेश मंत्री की ओर से भी फोन आया था। प्रक्रिया जारी है और ऐसा लग रहा है कि हम भारत के दूतावास या विदेश मंत्रालय से बड़ी मदद मिलने के काफी करीब हैं। इसके अलावा सिर्फ भारत सरकार ही नहीं, बल्कि कई भारतीय लोग और संस्थाएं भी संपर्क कर रही हैं। हमें उम्मीद है कि भारतीय लोगों की ओर से जल्द ही काफी चिकित्सा उपकरण, मेडिकल सामान और दूसरी जरूरी चीजें मिलेंगी।
सवाल: आप गाजा की मौजूदा मानवीय स्थिति को कैसे देखते हैं और आज फिलिस्तीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
जवाब: जब हम मानवीय स्थिति की बात करते हैं, तो इसे सिर्फ एक तरह की समस्या नहीं कहा जा सकता। यहां कई तरह की मानवीय परेशानियां हैं और हर एक की अपनी गंभीरता है। हम इजरायली युद्ध के लगभग 1,000 दिन पूरे होने के करीब हैं। इजरायल ने गाजा में सब कुछ तबाह कर दिया है। बुनियादी ढांचा और खुद स्वास्थ्य व्यवस्था भी। गाजा के 36 अस्पतालों में से अब केवल करीब 17 अस्पताल ही आंशिक रूप से काम कर रहे हैं। लगभग सात लाख फिलिस्तीनी छात्रों ने दो साल की पढ़ाई खो दी है। अभी दो दिन पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की, जिसमें बच्चों और उनके बचपन के नुकसान के मुद्दे पर बात की गई है, जो इजरायली हमलों से प्रभावित हुए हैं। इसलिए जब हम मानवीय स्थिति की बात करते हैं, तो गाजा में हर चीज बेहद खराब हालत में है। अगर इसे अलग-अलग हिस्सों में देखें, तो भूख और खाने की कमी अभी भी गाजा में मौजूद है। हालांकि कुछ महीने पहले जैसी स्थिति थी, वैसी ही मात्रा में नहीं है, लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है। लोगों को अभी भी निशाना बनाया जा रहा है। पिछले अक्टूबर में युद्धविराम की घोषणा के बाद से अब तक 1,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें 250 बच्चे शामिल हैं। हम सेव द चिल्ड्रन के अनुसार लगभग 5,000 बच्चों की बात कर रहे हैं। हाल की संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में करीब 5,000 बच्चों के शव अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं।
सवाल: फिलिस्तीन को संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से क्या उम्मीदें हैं?
जवाब: इस समय सबसे अहम बात यह है कि हम सिर्फ संयुक्त राष्ट्र की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों की बात कर रहे हैं जो मानवीय सहायता, निगरानी और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े मामलों में काम कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र से हमारी उम्मीद है कि वह लगातार ऐसी विस्तृत और प्रमाणित रिपोर्टें जारी करता रहे, जिनमें फिलिस्तीन में चल रही मानवीय और बेहद गंभीर स्थिति को दर्ज किया जा रहा है।
सवाल : क्या आपको लगता है कि पश्चिम एशिया के हालिया संकट की वजह से फिलिस्तीन का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में पीछे चला गया है?
जवाब: बिल्कुल। अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध की वजह से हमारा मुद्दा, हमारा मामला, प्राथमिकता में नहीं रहा। युद्ध से करीब तीन महीने पहले तक पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय फिलिस्तीनी संघर्ष और गाजा का मुद्दा था। आज मुख्य मुद्दा अमेरिका-इजरायल-ईरान से जुड़ा मामला बन गया है, जो पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है।
सवाल: भारत और फिलिस्तीन के संबंधों को आप किस तरह देखते हैं?
जवाब: हमें पूरा भरोसा है कि भारत दो-राष्ट्र समाधान का मजबूती से समर्थन करता है। भारत हमेशा से फिलिस्तीनी लोगों के समर्थन में खड़ा रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने फिलिस्तीन से जुड़े प्रस्तावों के पक्ष में मतदान किया है। जमीन पर भी भारत शांति प्रक्रिया में काफी योगदान दे रहा है और फिलिस्तीन में कई विकास परियोजनाएं चला रहा है। एक बहुत महत्वपूर्ण बात यह है कि हम एक नए प्रोजेक्ट की शुरुआत के काफी करीब हैं। भारत फिलिस्तीन में खासकर वेस्ट बैंक इलाके में एक अस्पताल बनाने की परियोजना शुरू करने जा रहा है।

