पटना, 10 मई (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा बिहार में एनडीए पर परिवारवाद का आरोप लगाने पर सियासत तेज हो गई है। एनडीए के नेताओ ने कहा कि जो लोग खुद इस तरह का काम करते है, उनको सब लोग उसी तरह दिखाई देते हैं।
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा, “तेजस्वी यादव बिना सोचे-समझे बोलते हैं। जब उनके पिता लालू यादव जेल गए, तो राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया गया, जो अपना नाम तक लिखना नहीं जानती थीं। जब उपमुख्यमंत्री बनाने की बात आई, तो तेजस्वी को चुना गया, जो नौवीं कक्षा में फेल हैं और एक असफल क्रिकेटर हैं। बाद में, तेज प्रताप को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया और मीसा भारती को संसदीय चुनाव का टिकट दिया गया। वहीं, नीतीश कुमार के बेटे निशांत एक पढ़े-लिखे इंजीनियर हैं, जो अपने लिए खुद आगे का रास्ता बना रहे हैं।”
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, “अभी तो निशांत ने पदभार ही ग्रहण किया है और बिना उनके काम शुरू किए ही तेजस्वी यादव अनर्गल टिप्पणी कर रहे हैं। लालू यादव जब मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने पशुपालन घोटाला किया, फिर वह जेल गए। तो क्या जिस दिन उन्होंने शपथ ली तब ही पता चल गया कि लालू यादव जेल जाने वाले हैं और घोटाला करने वाले हैं। निशांत योग्य हैं, यशस्वी हैं और वह दिखाएंगे कि स्वास्थ्य विभाग कितने अच्छे से चलाया जा सकता है।”
संजय सरावगी ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी पांचों साल चुनाव की तैयारी करती है। भाजपा जिस दिन सरकार में आती है, उसी दिन से चुनाव की तैयारी शुरू हो जाती है। जिन राज्यों में सरकार में नहीं आती, वहां भी तैयारी शुरु कर देती है। यूपी में अगले साल चुनाव होगा। वहां की जनता ने मन बना लिया है कि अखिलेश यादव का सूपड़ा साफ होगा। यूपी में आज मंत्रिमंडल का विस्तार है। नए मंत्री बनने वालों को बहुत शुभकामनाएं।”
वहीं, भाजपा सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि विपक्ष के नेता तेजस्वी को परिवारवाद की परिभाषा पता नहीं है। राजा का बेटा राजा बनता है लेकिन एनडीए में ये नहीं हो रहा है, जैसे अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव कर रहे हैं, उस तरह आज तक नहीं हुआ है। बिहार में जिस तरह से निशांत कुमार की एंट्री हुई है, उससे कोई नहीं बोल सकता है कि यहां परिवारवाद चल रहा है।
उधर, बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि यहां परिवारवाद नहीं चल रहा है, निशात कुमार जनता की पसंद हैं। अगर परिवारवाद ही करना होता तो इससे पहले के विधानसभा चुनाव में ही वे आ सकते थे लेकिन जब नीतीश कुमार राज्य से केंद्र गए हैं और उसके बाद वह बिहार की सियासत मेंं शामिल हुए हैं।

