पाकिस्तान में ढांचागत असमानताओं की सबसे बड़ी कीमत महिलाएं चुका रहीं: रिपोर्ट

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इस्लामाबाद, 10 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति भयावह है। ढांचागत असमानताओं की कीमत खासकर महिलाएं चुका रही हैं। जमीनी सच्चाई को दर्शाती रिपोर्ट ‘जिनोसाइड वॉच’ में प्रकाशित की गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में महिलाओं के खिलाफ हिंसा और भेदभाव के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। इनमें एसिड हमले, बाल विवाह, बलात्कार, मानव तस्करी, जबरन धर्म परिवर्तन और घरेलू हिंसा जैसे मामले शामिल हैं। हर साल सैकड़ों महिलाओं की “ऑनर किलिंग” के नाम पर हत्या होती है, जिसे कथित तौर पर पारिवारिक “सम्मान” का नाम दिया जाता है।

2024 में करीब 405 ऐसे ही मामले दर्ज किए गए, लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती हैं क्योंकि कई घटनाओं की भनक तक नहीं लगती है।

रिपोर्ट की मानें तो साल 2024 में 2,000 से अधिक घरेलू हिंसा और लगभग 5,000 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए। पाकिस्तान को महिलाओं के लिए दुनिया के सबसे असुरक्षित देशों में से एक बताया गया है।

2025 की एक संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि पाकिस्तान में हर तीन में से दो महिलाओं को प्रजनन अधिकारों की स्वतंत्रता नहीं मिलती और उन्हें अपनी सेहत से जुड़े फैसलों में दबाव और हिंसा का सामना करना पड़ता है। कम उम्र में लड़कियों को ब्याह दिया जाता है, जिससे कई तरह की गंभीर समस्याओं का उन्हें सामना करना पड़ता है, और लाखों लड़कियों की शादी 18 साल से पहले कर दी जाती है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि पाकिस्तान को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में सबसे निचले स्थान पर है। शैक्षिक स्तर भी खास अच्छा नहीं है। 2.1 करोड़ से अधिक बच्चे स्कूल से बाहर हैं, जिनके पीछे गरीबी, सामाजिक दबाव और बाल श्रम जैसे कारण बताए गए हैं।

धार्मिक अल्पसंख्यकों—जैसे अहमदिया, ईसाई और हिंदू—के खिलाफ भेदभाव, हिंसा और सामाजिक बहिष्कार की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग और कमजोर कानून-व्यवस्था को कारण बताया गया है। पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को भी सेंसरशिप, धमकी, गिरफ्तारी और हिंसा का सामना करना पड़ता है।

सुरक्षा स्थिति को जटिल बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में कई उग्रवादी संगठन सक्रिय हैं, जैसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासन प्रोविंस, अल-कायदा और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी, जो 2025–2026 में हमलों में शामिल रहे हैं।

जिनोसाइड वॉच ने यूरोपीय संघ से कहा है कि वह पाकिस्तान पर मानवाधिकार सुधारों के लिए दबाव बढ़ाए और जीएसपी प्लस के तहत जवाबदेही सुनिश्चित करे। साथ ही पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए आपातकालीन सुरक्षा और वीजा सुविधाएं बढ़ाने की भी सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट पाकिस्तान को महिलाओं के खिलाफ हिंसा, धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के क्षेत्रों में संरचनात्मक सुधार करने की आवश्यकता पर बल देती है और मशविरा देती है कि उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को इन मुद्दों पर अधिक सख्ती से संवाद स्थापित करना चाहिए।