दुश्मन के आगे सिर नहीं झुकाएंगे, बातचीत का अर्थ आत्मसमर्पण नहीं : पेजेश्कियन

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तेहरान, 10 मई (आईएएनएस)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता को उसकी कमजोरी न समझने की हिदायत दी है। रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट में पेजेश्कियन ने अपनी बात रखी।

एक्स पोस्ट में उन्होंने कहा, “हम दुश्मन के सामने सिर नहीं झुकाएंगे। अगर बातचीत या मोलभाव की बात उठती है, तो इसका मतलब सरेंडर (आत्मसमर्पण) या पीछे हटना नहीं है। बल्कि, इसका मकसद ईरान के अधिकारों को बनाए रखना और पूरी मजबूती के साथ राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।”

उनका बयान ईरानी सेना की तरफ से दिए गए उस बयान के बाद सामने आया है जिसमें उन्होंने किसी भी आक्रमण का पूरी ताकत से जवाब देने की बात कही गई है। ईरान की सेना का मत है कि “रणनीतिक धैर्य” का दौर समाप्त हो चुका है।

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार सैन्य अधिकारियों ने कहा कि देश के हितों, तटीय इलाकों या तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।

हाल के दिनों में ईरान के समुद्री क्षेत्रों और तेल टैंकरों के आसपास बढ़ती गतिविधियों और हमलों के बाद सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। ईरानी सेना के प्रवक्ता ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि किसी भी हमले का जवाब नई सैन्य तकनीक, आधुनिक हथियारों और बदली हुई युद्ध रणनीति से दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि संभावित विरोधियों को “बड़ा सरप्राइज” दिया जा सकता है।

ईरान ने उन देशों को भी अप्रत्यक्ष चेतावनी दी जो अमेरिका के साथ मिलकर उस पर आर्थिक और तेल प्रतिबंधों का समर्थन कर रहे हैं। सेना के मुताबिक ऐसे देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।

इस बीच ईरानी कमांडर की सुप्रीम लीडर से मुलाकात भी सुर्खियों में है। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि सैन्य कमांडर अली अब्दुल्लाही देश के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई से मिले। बैठक में कथित तौर पर क्षेत्रीय हालात, सैन्य तैयारियों और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुजतबा खामेनेई ने ईरानी सेना की सराहना करते हुए दुश्मनों का पूरी ताकत से सामना करने के लिए नए कदम उठाने की सलाह दी। हालांकि इन रणनीतियों और योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।