बेंगलुरु, 11 मई (आईएएनएस)। सोमवार को कर्नाटक के बेंगलुरु के कोथनूर इलाके में नारायणपुरा के पास एक अस्थायी झोपड़ी में आग लगने से दो बच्चों की मौत हो गई।
मृतकों की पहचान अर्जुन (5) और आशा (3) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से कर्नाटक के रायचूर जिले के रहने वाले और भाई-बहन थे।
उनके माता-पिता, दुर्गाप्पा और सावित्री, दिहाड़ी मजदूरी के लिए बेंगलुरु आए थे और पिछले छह महीनों से नारायणपुरा के पास बनी अस्थायी झोपड़ियों में रह रहे थे।
पुलिस के अनुसार, दंपति एक जेसीएस कंपनी में मजदूर के रूप में काम करते थे।
परिवार हाल ही में अपने पैतृक गांव में एक सप्ताह बिताने के बाद बेंगलुरु लौटा था।
पुलिस ने बताया कि ठेकेदार ने कथित तौर पर दंपति को निर्देश दिया था कि वे अपने बच्चों को कार्यस्थल पर न लाएं।
इसके बाद, मां काम पर जाने से पहले बच्चों को उनकी दादी के पास छोड़कर चली गई।
दोपहर लगभग 1 बजे दादी कथित तौर पर शौच के लिए शेड से बाहर निकलीं और बच्चों को अंदर अकेला छोड़ दिया।
इसी दौरान शेड में आग लग गई, जिससे बच्चे अंदर फंस गए।
पुलिस ने बताया कि एक बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।
यह घटना दोपहर लगभग 1:30 बजे घटी।
कोथनूर पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे, निरीक्षण किया और मामला दर्ज किया।
पुलिस ने आग लगने के सटीक कारण का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है।
26 अप्रैल की तड़के बेंगलुरु के बांदेपाल्या पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत सोमासुंदरपाल्या में लगी भीषण आग में कम से कम 20 अस्थायी शेड और कबाड़ के गोदाम जलकर खाक हो गए।
इस बस्ती में मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूर रहते थे, जो कबाड़ बीनकर और कचरा छांटकर अपना जीवन यापन करते थे।
फरवरी 2025 में बेंगलुरु के बाहरी इलाके में एक निर्माणाधीन इमारत में लगी एक अन्य आग दुर्घटना में दो निर्माण श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य सुरक्षित बच निकले।
यह घटना बेंगलुरु के मदनयकानहल्ली पुलिस स्टेशन क्षेत्र में सीगेहल्ली गेट के पास घटी।
पुलिस के अनुसार, आग एक निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत में लगी।
प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि आग गैस सिलेंडर के रिसाव या शॉर्ट सर्किट के कारण लगी होगी।
पुलिस ने बताया कि आग में फंसे दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य समय रहते इमारत से बाहर निकल गए।

