भागलपुर: 11614 पांडुलिपियों का किया गया सर्वेक्षण, ज्ञान भारतम ऐप पर ग्रंथ-दस्तावेज अपलोड

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भागलपुर, 11 मई (आईएएनएस)। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, कला एवं संस्कृति विभाग और बिहार सरकार के साझा प्रयास से ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत भागलपुर जिले की कुल 11614 पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। चम्पापुर दिगंबर जैन मंदिर, भगवान पुस्तकालय, शाह मार्केट के पीर दमड़िया, तिलकामांझी विश्वविद्यालय के सेंट्रल लाइब्रेरी, भागलपुर संग्रहालय एवं अन्य स्थानों से प्राप्त अनेकों प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों एवं दस्तावेजों को जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञान भारतम मोबाइल ऐप पर अपलोड किया जा चुका है।

जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने बताया कि कोई भी व्यक्ति अथवा संस्था जिनके पास पांडुलिपि का संग्रह हो, वे ज्ञान भारतम मिशन मोबाइल ऐप के मध्यम से उसकी संख्या, फोटो आदि को अपलोड कर उसकी जानकारी सरकार से साझा कर सकते हैं। अंकित रंजन ने स्पष्ट किया कि उनके पास संग्रहित पांडुलिपि का अधिकार हमेशा उन्हीं के पास रहेगा। इस मिशन का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को समग्र रूप से प्रस्तुत कर शोध एवं प्रकाशन के उपयोग के साथ छिपे ज्ञान को प्रकाश में लाना है। ज्ञान भारतम मिशन मोबाइल ऐप पर यदि अच्छे और वास्तविक पांडुलिपियों को दर्ज किया जाता है तो प्रोत्साहित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा उस व्यक्ति को सम्मानित भी किया जाएगा।

अंकित रंजन ने बताया कि पांडुलिपि के अंतर्गत वैसे हस्तलिखित ग्रंथ अथवा दस्तावेज आते हैं, जिनका सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक अथवा साहित्यिक महत्व हों। पांडुलिपि न्यूनतम 75 वर्ष पुराने होने चाहिए। ये कागज, ताड़पत्र, कपड़े अथवा अन्य पर हांथ से लिखे होने आवश्यक हैं।

उन्होंने बताया कि सोमवार को जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी ने महर्षि मेंही आश्रम, कुप्पा घाट से कुल 705 प्रतियों में पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कार्य पूर्ण किया। महर्षि मेंही द्वारा लिखित एवं संग्रहित इन पांडुलिपियों में अंग संस्कृति, न्याय धर्म एवं लघु कथाओं का अनुपम संग्रह है। मौके पर गुरुसेवी स्वामी भागीरथ जी महाराज, स्वामी नाथु बाबा, स्वामी पंकज बाबा, स्वामी उदय बाबा आदि उपस्थित थे। भागलपुर संग्रहालय में नवस्थापित पुस्तकालय का लोकार्पण इसी 14 मई को किया जाएगा।

अंकित रंजन ने सभी विद्वानों, लेखकों और पुस्तक प्रेमियों से आग्रह किया है कि कला, संस्कृति, इतिहास आदि विषय पर यदि उनके पास कोई पुस्तक अथवा ग्रंथ हैं तो उन्हें संग्रहालय में प्रदान कर सकते हैं ताकि आम पाठक उन्हें पढ़ सकें।

इस मुहिम से कई विद्वान जुड़कर पुस्तकालय की साहित्यिक ऊर्जा बढ़ा रहे हैं। इसी कड़ी में, गुरुसेवी स्वामी भागीरथ महाराज के सौजन्य से महर्षि मेंही आश्रम द्वारा प्रकाशित अनेक पुस्तकों को संग्रहालय के पुस्तकालय के लिए सहायक संग्रहालयाध्यक्ष अंकित रंजन को प्रदान किया गया।