चलती ट्रेनों में दो गर्भवती महिलाओं ने बच्चियों को दिया जन्म, रेलवे कर्मचारियों की मदद से दोनों सुरक्षित

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मुंबई, 13 मई (आईएएनएस)। सेंट्रल रेलवे के अलग-अलग रूट्स पर चल रही दो भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में दो गर्भवती महिलाओं ने सुरक्षित बच्चियों को जन्म दिया। रेलवे कर्मचारियों, नर्स, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और यात्रियों की मदद से दोनों प्रसव सुरक्षित तरीके से कराए गए।

पहली घटना मुंबई से भुसावल जा रही 22538 कुशीनगर एक्सप्रेस में हुई।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मुख्य टिकट निरीक्षक (सीटीआई) आर.एस. तेली लोकमान्य तिलक टर्मिनस से भुसावल सेक्शन तक ड्यूटी पर थे। ट्रेन के कल्याण स्टेशन पार करने के कुछ देर बाद जनरल डिब्बे के एक यात्री ने उन्हें बताया कि एक गर्भवती महिला को तेज प्रसव पीड़ा हो रही है।

जनरल डिब्बे में काफी भीड़ थी और महिला की हालत बिगड़ने लगी थी। ऐसे में रेलवे कर्मचारियों और यात्रियों ने महिला को ए-1 कोच के पास दरवाजे वाली जगह पर पहुंचाया।

इसी दौरान जनरल डिब्बे में सफर कर रही नर्स पूजा खड़गे ने आगे आकर मदद की। उनकी सहायता से चलती ट्रेन में ही महिला का सामान्य प्रसव कराया गया और उसने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।

इसके बाद तुरंत छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल ऑफिस रूम (सीसीओआर) को सूचना दी गई। इगतपुरी स्टेशन पर एंबुलेंस, स्ट्रेचर, डॉक्टर, और डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट की व्यवस्था की गई।

ट्रेन के इगतपुरी पहुंचने पर मां और नवजात बच्ची को रेलवे अस्पताल ले जाया गया, जहां दोनों की हालत सुरक्षित और स्थिर बताई गई।

दूसरी घटना पुणे-सुपौल एक्सप्रेस में हुई, जहां सेंट्रल रेलवे के ‘ऑपरेशन मातृशक्ति’ के तहत एक गर्भवती महिला ने सुरक्षित बच्ची को जन्म दिया।

ट्रेन पुणे रेलवे स्टेशन से समय पर रवाना हुई थी और बिहार के सुपौल जिले की ओर जा रही थी।

जनरल डिब्बे में सफर कर रही 28 वर्षीय रुखसाना खातून अपने पति जमील बेलावर के साथ यात्रा कर रही थीं। यह दंपति उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और उन्हें चंदौली जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर उतरना था, लेकिन ट्रेन के अहिल्यानगर स्टेशन के पास पहुंचते ही रुखसाना को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। ट्रेन तेज रफ्तार में थी और डिब्बे में भारी भीड़ होने के कारण तुरंत मेडिकल सहायता मिलना मुश्किल हो गया।

घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे अधिकारियों ने तुरंत ‘ऑपरेशन मातृशक्ति’ शुरू किया।

आरपीएफ जवानों, रेलवे कर्मचारियों और यात्रियों ने मिलकर ट्रेन में सुरक्षित प्रसव कराया। बाद में मां और नवजात को मेडिकल सहायता दी गई और दोनों की हालत स्थिर बताई गई।

इन दोनों घटनाओं ने दिखाया कि मेडिकल इमरजेंसी के दौरान रेलवे कर्मचारी, सुरक्षा बल, डॉक्टर और यात्री मिलकर किस तरह तुरंत मदद कर मां और नवजात की जान बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।