Sunday, June 28, 2026
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छत्तीसगढ़: सुरक्षा बलों ने माओवादियों के गुप्त ठिकानों का पता लगाया, भारी मात्रा में नकदी और हथियार जब्त

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रायपुर/बीजापुर, 13 मई (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों ने कई महत्वपूर्ण संयुक्त अभियानों के बाद नक्सली आंदोलन की रसद और वित्तीय रीढ़ को करारा झटका दिया है।

बीजापुर पुलिस, जिला रिजर्व गार्ड, स्पेशल टास्क फोर्स, कोबरा और सीआरपीएफ टीमों ने नक्सलियों के गुप्त ठिकानों का सफलतापूर्वक पता लगाया, जिनमें भारी मात्रा में नकदी, घातक हथियार और विस्फोटक बरामद हुए।

सुरक्षाकर्मियों ने 65.52 लाख रुपए नकद के साथ-साथ 32 अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा बरामद किया, जिनमें लाइट मशीन गन, सेल्फ-लोडिंग राइफल और कार्बाइन शामिल थे।

यह सफलता एक व्यापक और निरंतर अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत 2024 की शुरुआत से अब तक 20 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति बरामद की जा चुकी है, जिसमें लगभग 13 करोड़ रुपए मूल्य का एक बड़ा सोने का भंडार भी शामिल है।

पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि अभियान केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकारों के बीजापुर को नक्सल मुक्त क्षेत्र घोषित करने के रणनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है।

इन गुप्त ठिकानों की खोज एक गहन खुफिया नेटवर्क और स्थानीय ग्रामीणों के बढ़ते सहयोग के माध्यम से संभव हो पाई, जिन्होंने राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र और कवरगुट्टा जंगलों के दुर्गम इलाकों में छिपे हुए गुप्त स्थानों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।

हथियारों के अलावा टीमों ने 140 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट और यूरिया जब्त किया और सुरक्षित रूप से नष्ट कर दिया। ये सामग्रियां विस्फोटक उपकरण बनाने के लिए इस्तेमाल की जाती थीं।

इस कार्रवाई से नक्सलियों की हथियार प्राप्त करने और आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है, जो क्षेत्र में शांति बहाल करने के व्यापक प्रयास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

2025 से 2026 की अवधि के आंकड़े इस निरंतर दबाव की प्रभावशीलता को रेखांकित करते हैं, जिसके तहत अकेले इस अवधि में जिले से कुल 461 हथियार बरामद किए गए।

2024 की शुरुआत से सुरक्षा बलों ने 234 माओवादियों को मार गिराया है और 1,000 से अधिक के पुनर्वास में सहायता की है, जो स्थिरता और विकास की दिशा में एक और कदम का संकेत है। नकदी और उपकरणों के इन रणनीतिक भंडारों को नष्ट करके, संयुक्त बलों ने न केवल नक्सलियों की परिचालन क्षमता को कमजोर किया है, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में सुरक्षा तंत्र को भी मजबूत किया है।