कैसे दिखते हैं बूढ़े होते तारे, ईएसए ने दिखाई ‘फैंटम स्ट्रीक नेबुला’ की झलक

0
6

नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) ने एक शानदार तस्वीर जारी कर दिखाया है कि बूढ़े होते तारे अपने आखिरी दौर में कैसे दिखते हैं। हबल स्पेस टेलीस्कोप की इस तस्वीर में एक प्लैनेटरी नेबुला दिखाई दे रहा है, जिसमें तारे की बाहरी गैसीय परतें अंतरिक्ष में फैल गई हैं और तेज अल्ट्रावॉयलेट रोशनी में चमक रही हैं।

ईएसए ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “हबल का समय! यह तस्वीर एनजीसी 6741 नामक प्लैनेटरी नेबुला की है, जिसे फैंटम स्ट्रीक नेबुला भी कहा जाता है। यह नेबुला पृथ्वी से लगभग 7 हजार प्रकाश वर्ष दूर एक्विला (चील) तारामंडल में स्थित है। प्लैनेटरी नेबुला नाम सुनकर भ्रमित न हों, क्योंकि इसमें कोई ग्रह नहीं होता। 18वीं शताब्दी में खगोलविदों को दूरबीन में ये गैस के गोलाकार बादल हमारे सौर मंडल के ग्रहों जैसे दिखाई देते थे, इसलिए इसका यह नाम पड़ा।”

एनजीसी 6741 काफी चमकीला है, लेकिन सामान्य दूरबीन से यह बहुत छोटा दिखाई देता है। इसकी खोज पहली बार 1882 में एडवर्ड चार्ल्स पिकरिंग ने की थी।

अगर बूढ़े तारे के जीवन चक्र पर नजर डालें, तो सूर्य जैसे मध्यम आकार के तारे या उनसे थोड़े बड़े तारे जब अपना ईंधन खत्म करने लगते हैं, तब वे ‘रेड जायंट’ यानी लाल विशाल तारे में बदल जाते हैं। इस चरण में तारा फैल जाता है और अपनी बाहरी गैसीय परतों को अंतरिक्ष में छोड़ देता है। केंद्र में बचा हुआ गर्म और छोटा तारा तेज अल्ट्रावॉयलेट किरणें छोड़ता है, जो इन गैसों को चमका देती हैं। इसी अवस्था को प्लैनेटरी नेबुला कहा जाता है। ये नेबुला आमतौर पर करीब 10 हजार वर्षों तक चमकते रहते हैं। इसके बाद गैस धीरे-धीरे बिखर जाती है और पीछे केवल एक ठंडा, धुंधला सफेद बौना तारा बच जाता है।

एनजीसी 6741 सामान्य गोलाकार नेबुला से अलग है। इसका आकार आयताकार है, जो काफी हद तक चमकते तकिए जैसा दिखाई देता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसमें एक दूसरा तारा यानी बाइनरी स्टार भी मौजूद है, जिसकी वजह से इसकी आकृति अनोखी बनी है। प्लैनेटरी नेबुला आमतौर पर छल्ले, तश्तरी या नली जैसे आकार में दिखाई देते हैं। इनकी आकृति चुंबकीय क्षेत्र और आसपास मौजूद अन्य तारों के प्रभाव से तय होती है।