तिरुवनंतपुरम, 18 मई (आईएएनएस)। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को चुनावी हार और पार्टी के भीतर बढ़ती आलोचनाओं के बीच अब नई सरकार की ओर से एक और राजनीतिक असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली नई सरकार ने अपने पहले ही कैबिनेट बैठक में पूर्व माकपा नेता जी सुधाकरन को 16वीं केरल विधानसभा का प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करने की सिफारिश की है।
केरल विधानसभा का पहला सत्र 21 मई से शुरू होगा। संवैधानिक परंपरा के अनुसार प्रोटेम स्पीकर का पद वरिष्ठतम विधायक को दिया जाता है, लेकिन सुधाकरन की नियुक्ति ने इस बार बड़ा राजनीतिक महत्व हासिल कर लिया है।
दरअसल, सुधाकरन का माकपा नेतृत्व और खासकर पिनराई विजयन से लंबे समय से टकराव रहा है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत करते हुए अंबालापुझा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। उनकी जीत को माकपा के भीतर आंतरिक लोकतंत्र कमजोर होने के खिलाफ विरोध के रूप में देखा गया था।
अब राजनीतिक विडंबना यह है कि वही सुधाकरन विधानसभा के पहले दिन सदन की कार्यवाही संचालित करेंगे और नव-निर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाएंगे।
केरल की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पिनराई विजयन अपने पूर्व कैबिनेट सहयोगी और अब राजनीतिक विरोधी बन चुके सुधाकरन के सामने विधायक पद की शपथ लेने पहुंचेंगे।
राजनीतिक हलकों में इसे विजयन के लिए बेहद असहज और शर्मनाक स्थिति के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी और सरकार पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेता की छवि वाले विजयन के लिए यह घटनाक्रम बड़ा प्रतीकात्मक झटका माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, विजयन पहले दिन के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हो सकते हैं और बाद में स्थायी स्पीकर के सामने शपथ ले सकते हैं। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता तिरुवनचूर राधाकृष्णन को 22 मई को स्थायी स्पीकर चुना जा सकता है।
विधानसभा नियमों के अनुसार, यदि कोई सदस्य पहले दिन प्रोटेम स्पीकर के समक्ष शपथ नहीं लेता है, तो वह बाद में निर्वाचित स्पीकर के सामने शपथ ले सकता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब माकपा की जिला समिति बैठकों में पार्टी की हार को लेकर विजयन और शीर्ष नेतृत्व की तीखी आलोचना हो रही है।
ऐसे माहौल में विजयन खेमे के मुखर आलोचक रहे सुधाकरन को प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने से माकपा को राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दोनों स्तरों पर बड़ा झटका लगा है।
वहीं, सतीशन सरकार ने विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले ही विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है। अब नई विधानसभा का पहला सत्र केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि माकपा के भीतर बढ़ती दरारों और पिनराई विजयन की कमजोर पड़ती राजनीतिक पकड़ की सार्वजनिक याद दिलाने वाला घटनाक्रम बनता दिख रहा है।

