बंगाल सरकार ने भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच के लिए दो पैनल बनाए

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कोलकाता, 18 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार ने सोमवार को दो अलग-अलग जांच आयोगों के गठन की घोषणा की। इन दोनों आयोगों की अध्यक्षता कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे और ये संस्थागत भ्रष्टाचार तथा महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों की जांच करेंगे।

यह फैसला दिन में पहले हुई नई कैबिनेट की दूसरी बैठक में लिया गया, जिसके बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार दोपहर को इस कदम की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने सोमवार दोपहर मीडियाकर्मियों से कहा कि दोनों जांच आयोग जून से काम करना शुरू कर देंगे।

कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस बिस्वजीत बसु (रिटायर्ड) ‘संस्थागत भ्रष्टाचार’ के मामलों की जांच करने वाली समिति की अध्यक्षता करेंगे। दूसरी ओर, ‘महिलाओं के खिलाफ अपराध’ के मामलों की जांच करने वाली समिति की अध्यक्षता जस्टिस समाप्ति चट्टोपाध्याय करेंगी।

संस्थागत भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अपराध पर जांच आयोगों का गठन भाजपा द्वारा अपने चुनाव-पूर्व संकल्प पत्र (चुनावी घोषणापत्र) में किए गए वादों में से एक है। इन प्रस्तावों को सोमवार को नई राज्य कैबिनेट से औपचारिक मंजूरी मिल गई।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी दमयंती सेन, जो वर्तमान में पश्चिम बंगाल सशस्त्र पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक के रूप में कार्यरत हैं, उनको ‘महिलाओं के खिलाफ अपराध’ पर बनी समिति में शामिल किया गया है। उनकी मुख्य भूमिका पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े बड़े मामलों में डेटा और सबूत इकट्ठा करने की निगरानी करना होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की विभिन्न सामाजिक परियोजनाओं को लागू करने में भारी भ्रष्टाचार हुआ था। इन सामाजिक परियोजनाओं के तहत लाभ पाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती थी। आम लोगों को ठगा गया। कई सरकारी अधिकारी, पंचायत सदस्य, पार्षद और दलालों की पूरी श्रृंखला ऐसे भ्रष्ट कामों में शामिल थी। हमें इस संस्थागत भ्रष्टाचार के खिलाफ एक आयोग बनाना था। अब रिटायर्ड जस्टिस बसु के नेतृत्व में यह आयोग बना दिया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों आयोगों को लॉजिस्टिक सहायता मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल और गृह सचिव संघमित्रा घोष के कार्यालयों के माध्यम से प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि आयोग अपना काम शुरू करने के 30 दिनों के भीतर अपने सुझाव देना शुरू कर देंगे। पुलिस उनके सुझावों के आधार पर एफआईआर दर्ज करेगी। भारतीय न्याय संहिता, 2023 की उचित धाराओं के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी।