नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। सनातन धर्म में पंचांग के पांचों अंगों का विशेष महत्व है। इन पांच अंगों में तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार आते हैं, इन्हीं के आधार पर ही दिन की शुरुआत, शुभ-अशुभ समय और नए या शुभ कार्यों को करने के समय का निर्धारण किया जाता है। पंचांग केवल समय-सारणी नहीं, बल्कि जीवन को प्रकृति और ग्रहों के अनुकूल चलाने का प्राचीन वैज्ञानिक माध्यम भी है। 22 मई 2026 का पंचांग देखें तो ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है।
शुक्रवार को सूर्योदय 5 बजकर 27 मिनट पर होगा व सूर्यास्त शाम 7 बजकर 9 मिनट पर होगा। वहीं, चंद्रोदय सुबह 11 बजकर 1 मिनट पर और चंद्रास्त देर रात 12 बजकर 32 मिनट (23 मई) पर होगा।
षष्ठी तिथि की बात करें तो यह सुबह 6 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू हो जाएगी, हालांकि उदयातिथि (सूर्योदय के समय जो तिथि हो, उसी का पूरे दिन मान होता है) के अनुसार पूरे दिन षष्ठी तिथि का ही मान होगा। अश्लेषा नक्षत्र, शुक्रवार को पूरे दिन रहने के साथ देर रात 2 बजकर 8 मिनट (23 मई) तक रहेगा। बाद में मघा नक्षत्र लग जाएगा। वृद्धि योग सुबह 8 बजकर 19 मिनट तक और तैतिल करण सुबह 6 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
शुक्रवार के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 4 मिनट से 4 बजकर 46 मिनट तक, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 35 मिनट से 3 बजकर 30 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 8 मिनट से 7 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। यह समय शुभ कार्य के लिए उत्तम माना जाता है।
अशुभ समय की बात करें तो 22 मई को राहुकाल सुबह 10 बजकर 35 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक, यमगंड दोपहर 3 बजकर 43 मिनट से शाम 5 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 7 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 52 मिनट तक फिर दोपहर 12 बजकर 45 मिनट से 1 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। वहीं, दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 11 मिनट से 9 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। साथ ही, पूरे दिन गण्ड मूल का प्रभाव रहेगा, इसलिए सावधानी बरतनी चाहिए।

