Tuesday, May 26, 2026
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बंगाल में परियोजनाओं के कार्यान्वयन को भाजपा की जिलास्तरीय समितियां प्रशासन संग करेंगी समन्वय

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कोलकाता, 26 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में भाजपा की जिलास्तरीय कोर कमेटियां विभिन्न विकास परियोजनाओं विशेष रूप से केंद्र प्रायोजित परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखेंगी।

भाजपा की बंगाल यूनिट के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि 15 मई को राज्य के लिए पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक सुनील बंसल ने निर्देश दिया था कि जिलास्तरीय कोर कमेटियों के गठन का काम जल्द से जल्द पूरा किया जाए।

राज्य के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इनमें से हर जिलास्तरीय कोर कमेटी में प्रतिनिधियों के नाम पहले ही तय कर लिए गए हैं। कमेटियों के सदस्यों में संबंधित संगठनात्मक जिलों के अध्यक्षों, पर्यवेक्षकों, महासचिवों, पार्टी के लोकसभा सदस्यों और विधायकों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।

जिलास्तरीय कोर कमेटियों का गठन दो उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किया गया था। पहला उद्देश्य है, पार्टी के संगठनात्मक प्रतिनिधियों और संबंधित संगठनात्मक जिलों से पार्टी के चुने हुए प्रतिनिधियों के बीच सुचारू तालमेल बनाए रखना।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारण है पार्टी और प्रशासन के बीच सुचारू तालमेल बनाए रखना ताकि सभी जिलों में विकास योजनाओं विशेष रूप से केंद्र प्रायोजित योजनाओं का सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

जिलास्तरीय कोर कमेटियों के गठन का महत्व दोतरफा है। पहला, कोर कमेटियों की बैठकों में पार्टी के केंद्रीय और राज्य नेतृत्व के निर्देशों को संबंधित संगठनात्मक जिलों से पार्टी के चुने हुए जनप्रतिनिधियों जैसे सांसदों और विधायकों तक पहुंचाया जाएगा।

साथ ही, इन्हीं कोर कमेटी की बैठकों में चुने हुए जनप्रतिनिधि संबंधित संगठनात्मक जिलों के भीतर चल रही प्रशासनिक गतिविधियों के बारे में पार्टी नेतृत्व को जानकारी दे सकेंगे।

जिले के एक अन्य नेता ने कहा कि इससे जिला स्तर पर विकास की गतिविधियां असरदार ढंग से चल पाएंगी।

राजनीतिक जानकारों का मानना ​​है कि यह पहल कुछ हद तक पश्चिम बंगाल में 34 साल तक चली सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के काम करने के तरीके जैसी ही है। उस दौर में सीपीआई (एम) की जिला समितियां अपने चुने हुए सांसदों और विधायकों के जरिए जिला प्रशासन के साथ मिलकर अलग-अलग प्रशासनिक मामलों पर तालमेल बिठाती थीं।

हालांकि, वाम मोर्चा सरकार के समय प्रशासन और पार्टी के नेतृत्व के बीच हमेशा एक बारीक-सी लक्ष्मण रेखा बनी रहती थी। जहां एक तरफ सीपीआई (एम) के जिला सचिव और वाम मोर्चा के अध्यक्ष मध्य कोलकाता के अलीमुद्दीन स्ट्रीट स्थित सीपीआई (एम) मुख्यालय से पार्टी की नीतियों का ऐलान करते थे। वहीं, दूसरी तरफ प्रशासनिक फैसले तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य मध्य कोलकाता में स्थित तत्कालीन राज्य सचिवालय ‘राइटर्स बिल्डिंग्स’ से करते थे।

सत्ताधारी पार्टी और प्रशासन के बीच की वह लक्ष्मण रेखा पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान पूरी तरह से मिटा दी गई थी। उस समय, राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों ही तरह के फैसले तत्कालीन मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सर्वेसर्वा ममता बनर्जी द्वारा ही घोषित किए जाते थे, पहले ‘राइटर्स बिल्डिंग्स’ और बाद में ‘नबन्ना’ से।

एक राजनीतिक जानकार ने कहा कि यह तो जाहिर सी बात है कि किसी भी राज्य सरकार का कोई भी फैसला सत्ताधारी पार्टी की नीतियों को ही दर्शाएगा। हालांकि, राजनीतिक और प्रशासनिक दायरों के बीच हमेशा एक सीमा बनी रहनी चाहिए, जो पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय धुंधली पड़ गई थी। ऐसा लगता है कि भाजपा अब राजनीतिक और प्रशासनिक दायरों के बीच उस सीमा को फिर से कायम करने की पहल कर रही है।