हैदराबाद, 25 जुलाई (आईएएनएस)। तहरीक मुस्लिम शब्बान के अध्यक्ष मौलाना मुश्ताक मलिक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि देश के छात्रों और संविधान की जीत करार दिया। साथ ही उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन, छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई, गृह मंत्री की जवाबदेही और प्रधानमंत्री से माफी की मांग को लेकर भी अपनी बात रखी। इसके अलावा उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणी पर भी सवाल उठाए।
मौलाना मुश्ताक मलिक ने कहा कि आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन यह इस्तीफा किसी व्यक्ति की हार नहीं, बल्कि देश के छात्रों के संघर्ष की जीत है। छात्रों के आंदोलन और संयुक्त विपक्ष के प्रयासों ने इस परिणाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पिछले 12 वर्षों में न्याय के लिए लड़ने की सोच कमजोर पड़ गई थी, लेकिन छात्रों ने अपने आंदोलन के जरिए उसे फिर से जीवित किया और लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज की ताकत को साबित किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान छात्रों के साथ बर्बर व्यवहार किया गया। कई छात्रों को गंभीर चोटें आईं, अनेक छात्र अस्पतालों में भर्ती हैं, कुछ के पैरों में प्लास्टर चढ़ा हुआ है और एक छात्रा वेंटिलेटर पर है। इन घटनाओं की जवाबदेही सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री पर बनती है और उन्हें देश के सामने जवाब देना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। जंतर-मंतर पर चल रहा धरना केवल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त नहीं होना चाहिए। छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों पर स्पष्ट और आधिकारिक आदेश जारी किया जाए और आंदोलन के दौरान हुई कथित कार्रवाई की जवाबदेही तय की जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो भविष्य में युवाओं के साथ अन्याय जारी रह सकता है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना मुश्ताक मलिक ने कहा कि भागवत ने छात्रों के आंदोलन पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिक्रिया दी है, लेकिन जिन छात्रों की जान गई या जिन्होंने आत्महत्या की, उनके प्रति पर्याप्त संवेदना व्यक्त नहीं की। ऐसे मामलों में केवल समझाने की बात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है, जिनकी वजह से छात्र मानसिक दबाव में आए।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था में वैचारिक हस्तक्षेप बढ़ा है और इतिहास तथा शिक्षा प्रणाली में बदलाव के जरिए समाज के भाईचारे के माहौल को प्रभावित किया गया है। जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन ने आरएसएस की विचारधारा के विस्तार पर एक बड़ी चुनौती पेश की है। मोहन भागवत और आरएसएस नेतृत्व को देश के युवाओं की भावनाओं और सोच को समझते हुए आत्ममंथन करना चाहिए कि देश को किस दिशा में ले जाया जा रहा है।
मौलाना मुश्ताक मलिक ने आगे कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही और न्याय सबसे महत्वपूर्ण हैं तथा छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। छात्रों के साथ हुई कथित घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

