यरुशलम/नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। भारत-इजरायल के बीच खास और अनोखे संबंध पर जोर देते हुए, भारत में इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने मंगलवार को कहा कि दोनों देशों के बीच साझेदारी छह मुख्य मूल्यों पर आधारित है। इनमें सभ्यतागत लचीलापन, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, लोकतांत्रिक नियम, इनोवेशन, धार्मिक सहनशीलता और सबको साथ लेकर चलने वाला विकास शामिल हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो मैसेज में, अजार ने कहा, “इजरायल और भारत के बीच का संबंध बहुत खास और अनोखा है। जब मैंने इसके बारे में सोचा, तो मैं इस नतीजे पर पहुंचा कि हमारे इतने शानदार संबंध का कारण छह मुख्य मूल्य हैं।”
उन्होंने कहा, पहला है सभ्यता की मजबूती और राष्ट्रीय पुनरुत्थान।
उन्होंने आगे कहा, “सदियों से, हमारी सभ्यताओं पर विदेशी ताकतों ने हमला किया, हमारी पहचान को निशाना बनाया गया और पूरे इतिहास में, हमारी पहचान छीनने की कोशिश की गई। लेकिन एक हजार साल से भी ज्यादा समय तक हमें जिस मुश्किल से गुजरना पड़ा, उसके बावजूद हम बच गए; हमारी पहचान बच गई और यही बात हम सब में एक जैसी है। हम सभी आधुनिक देशों में हैं, जो अपनी पहचान, व्यक्तिगत और राष्ट्रीय, दोनों को फिर से जिंदा कर रहे हैं।”
अजार ने कहा कि दोनों देश दुनिया भर में कट्टरपंथ की बढ़ती लहर का सामना कर रहे हैं, खासकर कट्टरपंथी इस्लाम का। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग का दूसरा आधार आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई है। हम दुनिया भर में कट्टरपंथ की लहर का सामना कर रहे हैं, खासकर कट्टरपंथी इस्लाम से आ रही है, जो हमारे देश और हमारे देश के अस्तित्व के लिए खतरा है। और हमने उस खतरे से निपटने के लिए जरूरी तरीके बनाने के लिए दशकों से साथ मिलकर काम किया है।
भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बताते हुए, अजार ने जोर दिया कि तीसरा फैक्टर साझा लोकतांत्रिक मूल्य हैं। उन्होंने कहा कि बोलने की आजादी और उद्यमिता की आजादी दोनों सिस्टम में मौजूद एक आजाद भावना को दिखाती है और संबंध को और मजबूत करती है।
उन्होंने इस साझेदारी के चौथे सिद्धांत पर जोर दिया कि इनोवेशन और कॉम्पिटिटिवनेस है क्योंकि बेहतर जीवन स्तर पाने के लिए न सिर्फ आजादी बल्कि इनोवेशन और दुनिया को बेहतर बनाने की कोशिशों में सफलता भी जरूरी है।
अजार ने कहा, “इजरायल और भारत इनोवेशन के सोर्स रहे हैं। और हम मिलकर एक ज्यादा कॉम्पिटिटिव माहौल बनाने के लिए काम कर रहे हैं जिससे हम ज्यादा मजबूत और खुशहाल बन सकें।”
लंबे समय से चली आ रही साझेदारी के पांचवें चरण के तहत धार्मिक सहिष्णुता और आध्यात्मिक विरासत पर जोर देते हुए उन्होंने स्वीकार्यता और साथ मिलकर रहने की साझा मूल्यों को रेखांकित किया। साथ ही कहा कि भारत में यहूदी विरोध (एंटी-सेमिटिज्म) का कोई इतिहास नहीं रहा है।
अजार ने कहा, “हम पुरानी सभ्यताएं हैं, और हमारे यहां दूसरों को अपनाने की बहुत सुंदर परंपरा है। यहूदियों ने हजारों सालों से भारत में बहुत आराम महसूस किया है। इस देश में कभी भी यहूदी-विरोधी भावना नहीं रही।”
इजरायली राजदूत ने कहा कि लगातार लेकिन सबको साथ लेकर चलने वाला विकास ही आखिरी मुख्य मूल्य है। दोनों देश यह सुनिश्चित करने के लिए काम करते हैं कि जो लोग सुविधाओं से वंचित हैं, जिनके पास मौके नहीं हैं या जो शारीरिक या मानसिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उन्हें अर्थव्यवस्था में शामिल किया जाए।
अजार ने कहा कि इजरायल ये मूल्य केवल भारत के साथ साझा करता है। अब, जब हम साथ काम करते हैं तो उन मूल्यों को बढ़ावा देने पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। और इसके लिए न सिर्फ ज्यादा सोचने की जरूरत है, बल्कि मूल्यों को पूरा करने में कंटेंट डालने के लिए निवेश की भी जरूरत है।

