Wednesday, May 27, 2026
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कोटा में सी-सेक्शन से हुई मौतें: दवा कंपनी के खिलाफ कार्रवाई, विशेषज्ञ बोले- ऑक्सीटोसिन नहीं मौत का कारण

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जयपुर, 26 मई (आईएएनएस)। राजस्थान में उस समय गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया जब जैक्सन लैबोरेटरीज द्वारा निर्मित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का एक बैच कोटा में मातृ मृत्यु की जांच से संबंधित प्रयोगशाला परीक्षण में घटिया पाया गया। अधिकारियों ने बताया कि जांच के बाद इस बात की पुष्टि हुई कि उक्त कंपनी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है और प्रभावित बैच की बिक्री और उपयोग पर तत्काल राज्यव्यापी प्रतिबंध लगा दिया गया है।

उन्होंने अस्पतालों, फार्मेसियों और मेडिकल स्टोरों को भी अपने स्टॉक से इंजेक्शन हटाने का निर्देश दिया है। राजस्थान की प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) गायत्री राठौर ने आईएएनएस को पुष्टि की कि फार्मा कंपनी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि इस बात की भी जांच चल रही है कि क्या अस्पताल में भर्ती अन्य गर्भवती महिलाओं को भी यह दवा दी गई थी। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों ने इंजेक्शन को सीधे मौतों से जोड़ने के खिलाफ चेतावनी दी है। स्त्री रोग विशेषज्ञ रितिका माथुर ने आईएएनएस को बताया कि इंजेक्शन के कारण मातृ मृत्यु होने की संभावना बेहद कम है।

उन्होंने बताया कि मृत महिलाओं में से एक शिरीन को कथित तौर पर इंजेक्शन नहीं दिया गया था, फिर भी उनको गुर्दे फेल जैसी समस्या हुई और उनकी मृत्यु हो गई। कोटा में इलाज के दौरान पांच महिलाओं की मौत के बाद विवाद और गहरा गया।

इस घटना के बाद, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली की एक टीम ने जांच करने के लिए कोटा का दौरा किया।

जांच के दौरान, विशेषज्ञ टीम ने सिफारिश की कि मौतों के संबंध में निष्कर्ष निकालने से पहले मरीजों को दी गई दवाओं की जांच की जानी चाहिए।

इससे पहले, दवाओं के नमूने एकत्र करके प्रयोगशाला विश्लेषण के लिए भेजे गए थे, जिससे पता चला कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का बैच घटिया था और उसमें आवश्यक सक्रिय तत्व मौजूद नहीं था।

इस निष्कर्ष ने राज्य चिकित्सा विभाग और औषधि नियंत्रण अधिकारियों के बीच गंभीर चिंता पैदा कर दी है। राजस्थान खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्त कार्यालय से जारी एक आधिकारिक ड्रग अलर्ट के अनुसार, केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला द्वारा किए गए गुणवत्ता परीक्षण में नमूना विफल रहा।

जांचकर्ताओं ने बताया कि परीक्षण किए गए नमूने में ऑक्सीटोसिन की मात्रा बिल्कुल भी नहीं पाई गई। बताया जा रहा है कि इंजेक्शन की आपूर्ति कोटा के अस्पतालों को स्थानीय खरीद चैनलों के माध्यम से की गई थी। अधिकारी अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या इंजेक्शन का यही बैच अन्य अस्पतालों में भी वितरित किया गया था या खुले बाजार में पहुंचा था।

इस बीच, सहायक औषधि नियंत्रक देवेंद्र कुमार गर्ग ने बताया कि राजस्थान मेडिकल हॉल नामक फर्म ने इंजेक्शन की आपूर्ति की थी। उन्होंने यह भी बताया कि चार महीने की अवधि में प्रसव के दौरान लगभग 12,500 महिलाओं को ये इंजेक्शन लगाए गए थे। हालांकि, सोमवार को दवा परीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद, अधिकारियों ने असफल बैच के बचे हुए स्टॉक को जब्त कर लिया है।

अधिकारियों ने कोटा मेडिकल कॉलेज के भंडार से 2,479 इंजेक्शन जब्त किए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 25,000 रुपए है। जेके लोन अस्पताल से 72 इंजेक्शन जब्त किए गए, जबकि आपूर्तिकर्ता के पास आगे वितरण के लिए रखे गए लगभग 950 इंजेक्शन भी जब्त किए गए। गर्ग ने स्पष्ट किया कि रासायनिक विश्लेषण परीक्षण में ये इंजेक्शन इसलिए असफल रहे क्योंकि उनमें आवश्यक सक्रिय तत्व, ऑक्सीटोसिन, मौजूद नहीं था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इंजेक्शन के इस्तेमाल से सीधे तौर पर मृत्यु, गुर्दे की विफलता या इसी तरह की घातक जटिलताएं होने की संभावना नहीं है।