वॉशिंगटन, 28 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि इबोला वायरस से होने वाले संक्रमण के मामलों को अमेरिका में आने से रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन तेजी से काम कर रहा है। अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला के बढ़ते मामलों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच विदेश मंत्री ने यह बात कही।
व्हाइट हाउस में बुधवार (स्थानीय समय) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान रुबियो ने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता अमेरिकियों को किसी भी संभावित संक्रमण से बचाना है।
उन्होंने कहा कि हम किसी भी हालत में इबोला के मामलों को अमेरिका में आने नहीं देंगे।
रुबियो ने बताया कि विदेश विभाग, रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी), स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (एचएचएस) और कई अन्य एजेंसियां मिलकर उन इलाकों में काम कर रही हैं, जहां बीमारी फैली हुई है। खासकर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो में, ताकि वहां संक्रमण को रोका जा सके।
रुबियो ने कहा, “हमने वहां मदद और संसाधन बढ़ा दिए हैं, ताकि बीमारी को वहीं कंट्रोल किया जा सके।”
विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि अमेरिकी एजेंसियां यात्रियों और सीमाओं पर लगातार नजर रख रही हैं, ताकि कोई संक्रमित व्यक्ति देश में प्रवेश न कर सके।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी नागरिकों को भरोसा होना चाहिए कि राष्ट्रपति और उनका प्रशासन उनकी सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठा रहा है।
कैबिनेट बैठक के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इबोला के मुद्दे पर ज्यादा विस्तार से बात नहीं की। यह बैठक मुख्य रूप से ईरान, इमिग्रेशन, ऊर्जा नीति, रक्षा खर्च और सरकारी धोखाधड़ी की जांच जैसे विषयों पर केंद्रित थी।
रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका ने 20 देशों के साथ ऐसे समझौते किए हैं, जिनके तहत वे अमेरिका से निकाले गए लोगों को वापस स्वीकार करेंगे। यह कदम इमिग्रेशन नियमों को और सख्त करने की दिशा में लिया गया है।
प्रशासन ने स्वास्थ्य सुरक्षा को विदेश नीति से भी जोड़ा है। रुबियो ने कहा कि अमेरिकी विदेश नीति की सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा है।
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो में पिछले कई वर्षों में इबोला के कई प्रकोप हो चुके हैं, जिन पर स्थानीय सरकार, विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य साझेदार देशों ने मिलकर प्रतिक्रिया दी है।
इबोला एक बहुत ही संक्रामक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैल सकती है और गंभीर मामलों में इसकी मृत्यु दर बहुत अधिक होती है।

