Friday, May 29, 2026
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नीट परीक्षा सुधार संबंधी अधिकांश सिफारिशें पहले ही लागू हो चुकीं, पूर्व इसरो प्रमुख ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

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नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि नीट-यूजी 2024 विवाद के बाद गठित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति द्वारा की गई अधिकांश सिफारिशें को या तो लागू कर दिया गया है या उन पर तेजी से काम चल रहा है। साथ ही, कई सुधार पहले ही नीट परीक्षाओं के संचालन में लागू किए जा चुके हैं।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधारों पर गठित उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति (एचएलसीई) और उसकी सिफारिशों के कार्यान्वयन की निगरानी करने वाली उच्च स्तरीय संचालन समिति (एचपीएससी) के प्रमुख रहे राधाकृष्णन ने सर्वोच्च न्यायालय में दायर हलफनामे में कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा परीक्षाओं का पारदर्शी, सुचारू और निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करना था।

यह हलफनामा सर्वोच्च न्यायालय के 25 मई के उस निर्देश के जवाब में दायर किया गया था, जिसमें उनसे समिति की सिफारिशों के कार्यान्वयन की स्थिति से संबंधित जानकारी देने को कहा गया था।

के. राधाकृष्णन ने कहा कि नीट-यूजी विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जून 2024 में गठित एचएलसीई ने राज्य सरकारों, पुलिस अधिकारियों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, छात्र समूहों और वैश्विक परीक्षा एजेंसियों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श किया।

हलफनामे में कहा गया है, “एचएलसीई ने मेरी सरकार पोर्टल के माध्यम से भी हितधारकों से परामर्श किया और छात्रों, अभिभावकों, संरक्षकों, शिक्षकों, शिक्षाविदों आदि से 37,144 प्रतिक्रियाएं प्राप्त कीं।”

हलफनामे के अनुसार, समिति ने 21 अक्टूबर 2024 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें परीक्षा सुधार, डाटा सुरक्षा, एनटीए का संस्थागत पुनर्गठन, परीक्षा की निष्पक्षता, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और तकनीकी सुरक्षा उपायों को शामिल करते हुए 101 सिफारिशें की गईं।

हलफनामे में कहा गया है कि सिफारिशों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए 14 नवंबर 2024 को एक उच्चस्तरीय संचालन समिति का गठन किया गया था, जो एनटीए अधिकारियों द्वारा नियमित अंतराल पर समीक्षाओं और प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रगति की लगातार निगरानी कर रही है।

पहले से लागू किए गए उपायों पर प्रकाश डालते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि राज्य सरकारें अब राज्यस्तरीय समन्वय समितियों (एसएलसीसी) और जिलास्तरीय समन्वय समितियों (डीएलसीसी) के माध्यम से नीट परीक्षाओं के संचालन में सक्रिय रूप से शामिल हैं।

हलफनामे में कहा गया है, “एचएलसीई की सिफारिश के अनुसार, राज्य सरकारें अब नीट (यूजी) परीक्षा के संचालन में सक्रिय रूप से शामिल हैं। राज्य स्तरीय समन्वय समितियां (एसएलसीसी) और जिला स्तरीय समन्वय समितियां (डीएलसीसी) कार्यरत हैं और उन्होंने नीट (यूजी) 2025 और 2026 की परीक्षाओं के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”

इसमें आगे कहा गया है कि नीट यूजी 2026 के 99.5 प्रतिशत से अधिक परीक्षा केंद्र सरकारी संस्थान थे और शहर समन्वयकों को सरकारी स्कूलों और केंद्रीय विद्यालयों से लिया गया था।

एनटीए को मजबूत करने के संबंध में हलफनामे में कहा गया है कि सरकार ने 16 नए वरिष्ठ पद सृजित किए हैं और आईआईटी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) जैसे संस्थानों से संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों को तैनात किया है।

राधाकृष्णन ने शीर्ष न्यायालय को यह भी बताया कि प्रस्तावित ‘डिजी-एग्जाम’ प्रणाली के पहले चरण के तहत नीट-यूजी उम्मीदवारों के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण शुरू किया गया है।

हलफनामे में कहा गया है, “एचपीएससी ने गौर किया कि एनटीए ने डिजी-एग्जाम प्रणाली के कार्यान्वयन के पहले चरण के हिस्से के रूप में नीट (यूजी) परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवारों के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण शुरू किया है।”

इसमें आगे यह भी दर्ज किया गया कि बहुस्तरीय तलाशी तंत्र शुरू किया गया है। परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी निगरानी का विस्तार किया गया है और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के गलत उपयोग को रोकने के लिए मोबाइल जैमर लगाए गए हैं।

हलफनामे में यह भी कहा गया है कि उम्मीदवारों की प्रतिक्रियाओं में संदिग्ध पैटर्न और विसंगतियों की पहचान करने के लिए अब डाटा एनालिटिक्स टूल का उपयोग किया जा रहा है, जबकि एआई और मशीन लर्निंग आधारित कार्यात्मकताओं के माध्यम से शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है।

परीक्षा प्रारूप के मुद्दे पर राधाकृष्णन ने कहा कि विशेषज्ञ समिति ने नीट-यूजी को पेन-एंड-पेपर मोड से कंप्यूटर-आधारित परीक्षा (सीबीटी) प्रारूप में क्रमिक रूप से बदलने की सिफारिश की है। साथ ही बहु-सत्र और बहु-चरणीय परीक्षा की भी।

हलफनामे में कहा गया है, “नीट यूजी की संरचना पर एचएलसीई ने पेन-एंड-पेपर से कंप्यूटर-आधारित परीक्षा में परिवर्तन की सिफारिश की थी।” हालांकि, इसमें स्पष्ट किया गया है कि ऐसी सिफारिशों को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के परामर्श से लागू किया जाना होगा, जो नीट-यूजी के लिए नोडल मंत्रालय है।

शैक्षिक परीक्षण अनुसंधान, सूचना सुरक्षा उन्नयन, एआई आधारित निगरानी प्रणाली और प्रवेश परीक्षाओं के मानकीकरण सहित कई दीर्घकालिक सुधार समिति की देखरेख में चरणबद्ध तरीके से लागू किए जा रहे हैं।

यह हलफनामा 2026 के पेपर लीक विवाद के बाद नीट-यूजी के संचालन में व्यापक सुधारों की मांग करने वाली याचिकाओं की पृष्ठभूमि में आया है।