Sunday, May 31, 2026
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‘धरती को झुलसाने की नीति और सामूहिक सजा’ से कुछ हासिल नहीं होगा: लेबनान के पीएम सलाम

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बेरूत, 31 मई (आईएएनएस)। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने दक्षिणी क्षेत्र में इजरायल की ओर से हो रहे ताबड़तोड़ हमले को खतरनाक करार दिया। उन्होंने तत्काल युद्धविराम की मांग करते हुए कहा कि “धरती को झुलसाने की नीति” इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकती।

टेलीविजन संबोधन में सलाम ने अपनी सरकार की ओर से तेल अवीव के साथ सीधी बातचीत का भी बचाव किया।

सलाम ने अपनी सरकार की ओर से इजरायल के साथ सीधे बातचीत का भी बचाव किया। जिसका ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह विरोध करता है और कहा कि ये वार्ताएं लेबनान को “सबसे कम नुकसान पहुंचाने वाला रास्ता” है।

उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों में इजरायल की ओर से की गई खतरनाक और जरूरत से ज्यादा सैन्य बढ़त को देखते हुए, यह आवश्यक है कि राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयासों को तेज किया जाए ताकि जल्द और वास्तविक युद्धविराम हासिल किया जा सके।”

सलाम ने इजरायल पर “धरती को झुलसाने की नीति और सामूहिक सजा” अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इजरायल “शहरों और गांवों को नष्ट कर रहा है और लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर कर रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की नीति इजरायल को “न तो सुरक्षित रखेगी और न ही क्षेत्र में स्थिरता” लाएगी।

यह बयान ऐसे समय दिया गया जब इजरायली सेना लगातार दक्षिणी लेबनान के कई गांवों के लिए नए निकासी आदेश जारी कर रही है। दूसरी ओर वाशिंगटन की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता जारी है।

सलाम ने कहा कि इजरायल के साथ सीधी बातचीत का परिणाम “गारंटीशुदा नहीं है।” उन्होंने कहा, “मैं लेबनान के लोगों से पूरी स्पष्टता के साथ बात करना चाहता हूं। क्या इन वार्ताओं की सफलता की गारंटी है? बिल्कुल नहीं। लेकिन आज हमारे सामने मौजूद अन्य विकल्पों की तुलना में यह हमारे देश और हमारे लोगों के लिए सबसे कम कीमत चुकाने वाला रास्ता है।”

सलाम के अनुसार, “इसके लिए एकाधिकार की सोच को छोड़ना होगा और जिद को समाप्त करना होगा। क्योंकि आज राज्य सभी लेबनानी नागरिकों की ओर से बातचीत कर रहा है, और सभी का कर्तव्य है कि वे राज्य के झंडे तले एकजुट हों।”

इजरायल ने हाल के दिनों में हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपने हवाई और जमीनी हमलों को तेज कर दिया है। 17 अप्रैल को संघर्ष रोकने के लिए एक औपचारिक युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार इसका पालन कभी पूरी तरह नहीं हुआ।