अमरावती, 1 जून (आईएएनएस)। भारत का 18वां रेलवे जोन दक्षिण तटीय रेलवे (एससीओआर), जिसका मुख्यालय विशाखापत्तनम में है, ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर परिचालन शुरू कर दिया, जिससे उत्तरी तटीय आंध्र के लोगों का लंबे समय से संजोया हुआ सपना पूरा हुआ। यह क्षेत्र लंबे समय से समर्पित रेलवे प्रशासन और बुनियादी ढांचा विकास की मांग कर रहा था।
आंध्र प्रदेश और पड़ोसी तेलंगाना और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में फैले इस नए क्षेत्र की स्थापना ने आखिरकार लोगों की दशकों पुरानी आकांक्षा को पूरा कर दिया है।
विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा, गुंटूर और गुंटकल के रेलवे डिवीजनों से मिलकर बने दक्षिण तटीय रेलवे (एससीओआर) जोन से रेलवे बुनियादी ढांचे के विस्तार के माध्यम से क्षेत्र में कनेक्टिविटी और माल परिवहन में सुधार होने, नए रोजगार के अवसर पैदा होने और संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
एससीओआर का गठन पूर्व दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) और पूर्वी तट रेलवे (ईसीओआर) जोन के कुछ हिस्सों के पुनर्गठन के माध्यम से किया गया है।
अपने नेटवर्क के अंतर्गत 385 रेलवे स्टेशनों के साथ, दक्षिण तट रेलवे जोन में 62,000 कर्मचारी होगे और इसका वार्षिक राजस्व लगभग 15,500 करोड़ रुपए होगा। परिचालन सत्र के दौरान इसके द्वारा 500 से अधिक यात्री ट्रेनों और 800 मालगाड़ियों का संचालन किए जाने की उम्मीद है।
यह नया जोन विशाखापत्तनम, गंगावरम, कृष्णापटनम, काकीनाडा और आगामी मुलापेटा बंदरगाह जैसे प्रमुख बंदरगाहों को जोड़कर माल ढुलाई और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स में सुधार लाने की भी उम्मीद है।
केंद्र सरकार ने 5 मई को एक राजपत्र अधिसूचना जारी कर दक्षिण तट रेलवे जोन की स्थापना की।
दक्षिण मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाले गुंटकल, गुंटूर और विजयवाड़ा डिवीजनों का पुनर्गठन कर उन्हें नए रेलवे जोन का हिस्सा बना दिया गया है। पूर्वी तट रेलवे के खंडित वाल्टेयर डिवीजन का नाम बदलकर विशाखापत्तनम डिवीजन कर दिया गया है और इसका पुनर्गठन किया गया है।
दक्षिण तटीय रेलवे जोन के आधिकारिक रूप से परिचालन शुरू होने से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। विभिन्न दलों के नेताओं ने इस विकास की सराहना की और इसे आंध्र प्रदेश और विशेष रूप से उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने इस अवसर को मनाने के लिए सोमवार को स्थानीय विधायकों के साथ श्रीकाकुलम जिले के विभिन्न रेलवे स्टेशनों का दौरा किया।
तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेता ने रेलवे प्लेटफार्मों पर आयोजित बैठकों में स्थानीय निवासियों के साथ अपनी खुशी साझा की।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “दक्षिण तट रेलवे जोन का प्रारंभ आंध्र प्रदेश, विशेषकर उत्तराध्र के लोगों के लिए एक भावनात्मक और लंबे समय से संजोया हुआ सपना पूरा होने जैसा है।”
उन्होंने कहा कि आज का दिन मेरे लिए सचमुच एक विशेष क्षण था, जब मैने इच्छापुरम के पास रेलवे ट्रैक के किनारे दक्षिण तट रेलवे जोन की स्वागत पट्टिका देखी, जो हमारे क्षेत्र के विकास यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है। इस ऐतिहासिक अवसर पर मैने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को चिह्नित करते हुए स्वागत पट्टिका के पास पौधे भी लगाए।
राम मोहन नायडू के चाचा और राज्य के कृषि मंत्री के. अचन्नाइजु का मानना है कि दक्षिण तटीय रेलवे जोन उत्तरी आंध्र के परिवहन परिदृश्य को बदल देगा और रोजगार के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के समय, तत्कालीन कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने विशाखापत्तनम को मुख्यालय बनाकर एक नए रेलवे जोन का वादा किया था।
हालांकि, केंद्र सरकार ने नए जोन के निर्माण की घोषणा 2019 में ही की थी और एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई थी।
नए जोन के प्रशासनिक पहलुओं से संबंधित कार्यों में तेजी तभी आई, जब 2024 में एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने राज्य में सत्ता संभाली।
जनवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशाखापत्तनम में 149 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले दक्षिण तट रेलवे क्षेत्रीय मुख्यालय के निर्माण की आधारशिला रखी।
मुख्यालय को अस्थायी रूप से विशाखापत्तनम महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (वीएमआरडीए) कार्यालय में स्थापित किया गया है।
जून 2025 में केंद्र ने संदीप माथुर को दक्षिण तट रेलवे जोन का महाप्रबंधक नियुक्त किया।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अप्रैल में विशाखापत्तनम की अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के साथ दक्षिण तटीय रेलवे जोन के संचालन की समीक्षा की।
विशाखापत्तनम के रहने वाले राज्य भाजपा अध्यक्ष पीवीएन माधव के अनुसार, अलग रेलवे जोन की मांग को लेकर जन आंदोलन 1980 के दशक में शुरू हुआ था।
पूर्व एमएलसी ने याद दिलाया कि अपने कॉलेज के दिनों में उन्होंने विशाखापत्तनम को मुख्यालय बनाकर एक अलग रेलवे जोन की मांग को लेकर हुए आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया था।
जोन के उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने कहा कि वर्षों से भाजपा कार्यकर्ता, जन प्रतिनिधि, रेलवे कर्मचारी संघ और विभिन्न जन संगठनों ने इस आकांक्षा के लिए अथक संघर्ष किया है।
माधव ने याद दिलाया कि भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों से बनी संयुक्त कार्य समिति (जेएसी) के हिस्से के रूप में उन्होंने रेल मंत्रियों और केंद्र सरकारों को कई बार ज्ञापन सौंपे थे।
भाजपा द्वारा 20 मार्च, 2010 को विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन पर एक विशाल रेल रोको आंदोलन का आयोजन किया गया था।
उन्होंने कहा, “इस मांग की जड़े कई दशकों पुरानी है। जब दक्षिण मध्य रेलवे जोन का गठन हुआ तो अधिकांश तेलुगु भाषी क्षेत्रों को चेन्नई स्थित मुख्यालय वाली दक्षिणी रेलवे से अलग कर दिया गया। हालांकि, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण वाल्टेयर डिवीजन कोलकाता स्थित मुख्यालय वाली दक्षिण पूर्वी रेलवे के अधीन ही रहा। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अपर्याप्त रेलवे बुनियादी ढांचे, सीमित रोजगार के अवसर, नई ट्रेनों के शुरू होने में देरी और भीड़भाड़ वाली सेवाओं जैसे मुद्दे अनसुलझे ही रहे।
उन्होंने कहा, “1997 में कांग्रेस समर्थित संयुक्त मोर्चा सरकार ने भुवनेश्वर में मुख्यालय वाले पूर्वी तट रेलवे जोन की नींव रखी, और बाद में वाल्टेयर डिवीजन को इसके अंतर्गत लाया गया।”
उन्होंने कहा, “आंध्र प्रदेश के हितों की उपेक्षा, भर्ती के अवसरों में भेदभाव और यात्री एवं कर्मचारी कल्याण पर अपर्याप्त ध्यान देने से संबंधित चिताओं ने विशाखापत्तनम में मुख्यालय वाले एक अलग रेलवे जोन की मांग को और मजबूत किया है।”
उनका मानना है कि साउथ कोस्ट रेलवे जोन से रेलवे लॉजिस्टिक्स, माल ढुलाई, औद्योगिक कनेक्टिविटी, रोजगार सृजन और यात्री सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा।
यह उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश के आर्थिक परिवर्तन के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा और भारत की विकास गाथा में आंध्र प्रदेश के योगदान को और मजबूत करेगा।

