देहरादून, 3 जून (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), देहरादून ने 29 मई को विशेष न्यायालय (पीएमएलए), देहरादून के समक्ष पीयूष चंद्र भटनागर और रंजना रावत के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत डीएवी (पीजी) कॉलेज छात्रवृत्ति घोटाला मामले के संबंध में एक अभियोजन शिकायत (पीसी) दायर की है।
ईडी ने उत्तराखंड पुलिस द्वारा आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। एफआईआर और उसके बाद दायर चार्जशीट में आरोप लगाया गया था कि एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति फंड का, देना बैंक में रखे गए एक अनाधिकृत बैंक खाते के माध्यम से धोखाधड़ी करके गलत इस्तेमाल और हेराफेरी की गई। जांच में पता चला कि उक्त खाते में 2009 से 2014 की अवधि के दौरान छात्रवृत्ति फंड अन्य डीएवी कॉलेज खातों से ट्रांसफर किया गया और उसमें लगभग 2.27 करोड़ रुपए का ब्याज जमा हुआ था।
पीएमएलए के तहत की गई जांच में यह भी खुलासा हुआ कि डीएवी (पीजी) कॉलेज की प्रबंध समिति ने देना बैंक, लक्ष्मी रोड शाखा में एक बैंक खाता खोलने की मंजूरी दी थी, लेकिन शाखा का नाम धोखाधड़ी करके बदल दिया गया और डीएवी (पीजी) कॉलेज के कर्मचारियों- पीयूष चंद्र भटनागर और उनके सहयोगियों द्वारा देना बैंक, डीएमएस रोड शाखा में एक अनाधिकृत बैंक खाता खोल लिया गया।
जांच से यह साबित हुआ कि पीयूष चंद्र भटनागर, जो डीएवी (पीजी) कॉलेज में छात्रवृत्ति प्रभारी/सहायक लिपिक (बाद में कार्यालय अधीक्षक) के रूप में कार्यरत थे, ने ‘अपराध से अर्जित आय’ को उत्पन्न करने, छिपाने, अपने कब्जे में रखने और उसका उपयोग करने में मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने धोखाधड़ी करके बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया में हेरफेर किया, खुद को खाता संचालक के रूप में शामिल किया और एससी/एसटी/ओबीसी श्रेणियों के छात्रों के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति फंड को सुनियोजित तरीके से गलत जगह भेज दिया।
जांच में आगे यह भी पता चला कि अनाधिकृत खाते में जमा कुल फंड में से 42.50 लाख रुपए नकद निकाले गए, 66.50 लाख रुपए विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर जारी किए गए चेकों के माध्यम से निकाल लिए गए और 99.43 लाख रुपए पीयूष चंद्र भटनागर के कई निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। इसके बाद गलत जगह भेजे गए इन फंडों को कई बैंक खातों के माध्यम से घुमाया गया और उनका उपयोग स्वयं तथा परिवार के सदस्यों के नाम पर बीमा प्रीमियम का भुगतान करने, नकद निकासी करने, खातों के बीच ट्रांसफर करने और अन्य निजी खर्चों के लिए किया गया।
जांच में आगे पता चला कि रंजना रावत, जो डीएवी (पीजी) कॉलेज के बैंक खातों की स्कॉलरशिप कोऑर्डिनेटर और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के तौर पर काम कर रही थीं, ने अपराध से हासिल रकम को बनाने और उसकी मनी लॉन्ड्रिंग में मदद करने वाली भूमिका निभाई। उन्होंने देना बैंक खातों से जुड़े कई खाली चेकों पर हस्ताक्षर करने की बात स्वीकार की, जिनका बाद में स्कॉलरशिप फंड निकालने और उसे दूसरी जगह भेजने के लिए इस्तेमाल किया गया। आगे जांच में यह भी पता चला कि इन हस्ताक्षरित चेकों की मदद से अनाधिकृत वित्तीय लेनदेन किए गए और विभिन्न लाभार्थियों तथा बैंक खातों के जरिए अपराध से हासिल रकम की लेयरिंग की गई।
जांच में यह भी साबित हुआ कि अपराध से हासिल रकम का कुछ हिस्सा चल संपत्तियों में बदल दिया गया, जिसमें पीयूष चंद्र भटनागर और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर ली गई बीमा पॉलिसी, बैंक बैलेंस और एक गाड़ी शामिल थी। इसके अनुसार, 27.05.2026 के अस्थायी कुर्की आदेश के तहत 7.86 लाख रुपए की चल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया गया।
जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर, जिसमें बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजी सबूत और पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयान शामिल हैं, इसी को लेकर ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 3 और 4 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध करने के लिए विशेष न्यायालय (पीएमएलए), देहरादून के समक्ष अभियोजन शिकायत दायर की है।

