Monday, June 8, 2026
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बिहार: पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने राजद एससी-एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा

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पटना, 8 जून (आईएएनएस)। बिहार विधान परिषद चुनाव में राजद की ओर से सुनील सिंह को एक बार फिर से उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर पार्टी में असंतोष साफ दिखने लगा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने इस निर्णय को लेकर जहां मोर्चा खोल दिया है वहीं पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने राष्ट्रीय जनता दल के अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।

पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव को भेजे गए दो पन्ने के त्यागपत्र में राजद नेता शिवचंद्र राम ने बिहार विधान परिषद की रिक्त सीट को लेकर दलित समाज और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाया है।

शिवचंद्र राम ने लिखा कि विधान परिषद सीट को लेकर दलित, रविदास समाज और हजारों समर्पित कार्यकर्ताओं में उम्मीद थी, लेकिन हाल की घटनाओं से समाज में निराशा और पीड़ा बढ़ी है। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी पद का लोभ नहीं है, लेकिन जिस समाज ने उन पर विश्वास जताया, उसकी भावनाओं की अनदेखी कर पद पर बने रहना नैतिक रूप से संभव नहीं है।

पत्र में उन्होंने विधान परिषद और राज्यसभा में दलित, आदिवासी, पिछड़ा, अतिपिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नीति बनाने की भी मांग की है।

शिवचंद्र राम ने लालू यादव, राबड़ी देवी और पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि सामाजिक न्याय, सम्मान और बराबरी की लड़ाई वे आगे भी जारी रखेंगे। पार्टी के भीतर इस इस्तीफे को दलित प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है।

उन्होंने पत्र में यह साफ किया है कि यह त्यागपत्र केवल पद से है, पार्टी की सक्रिय सदस्यता से नहीं है। मैं पार्टी में सक्रिय सदस्य बना रहूंगा। सामाजिक न्याय की विचारधारा और पार्टी के प्रति मेरा विश्वास आज भी अटूट है, लेकिन अपने समाज की पीड़ा को अनदेखा कर इस पद पर बने रहना मेरे लिए संभव नहीं है।

उन्होंने पत्र में लिखा, “समाज ने भी राजद और नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त किया। हजारों कार्यकर्ताओं ने दिन-रात मेहनत की। हम सबके मन में यह विश्वास था कि संघर्ष, समर्पण और समाज की आकांक्षाओं को सम्मान मिलेगा। लेकिन हाल के घटनाक्रम ने मुझे भीतर तक झकझोर दिया है।”

इससे पहले रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया के जरिए इस निर्णय का विरोध जताते हुए कहा था कि पार्टी की स्थापना के समय से लेकर आज तक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े एक नहीं, अनेकों समर्पित, सम्मानित, जमीन से जुड़े कट्टर लालूवादी अल्पसंख्यक चेहरे हैं। यादव, दलित, पिछड़े और वंचित समाज से आने वाले वरिष्ठ और युवा लोग हैं। ऐसे लोगों की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय है और पार्टी हित में तो कतई नहीं है।