नई दिल्ली, 8 जून (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण पर जुलाई तक हस्ताक्षर हो सकते हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को यह जानकारी दी।
एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए गोयल ने संकेत दिया कि हाल के टैरिफ संबंधी मुद्दों के बावजूद दोनों देशों के बीच वार्ता अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है।
मंत्री के इस बयान से उन व्यापार वार्ताओं में जल्द प्रगति की उम्मीद बढ़ गई है, जो पिछले कई महीनों से चल रही हैं। भारत और अमेरिका दोनों आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और कारोबार के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
प्रस्तावित समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, इससे भारतीय निर्यातकों को कई प्रमुख क्षेत्रों में नए अवसर मिल सकते हैं।
वार्ता की प्रगति पर बात करते हुए गोयल ने कहा कि हाल के सप्ताहों में भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच बातचीत में काफी आगे बढ़त हुई है और अब बचे हुए मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की जा रही है।
मंत्री की ताजा टिप्पणी उनके पिछले सप्ताह दिए गए बयान को आगे बढ़ाती है। 5 जून को गोयल ने कहा था कि अमेरिका के विभिन्न व्यापार विभागों के अधिकारियों की एक पूरी टीम नई दिल्ली आई थी और उन्होंने भारतीय अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की थी ताकि बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके।
गोयल ने कहा था, “अमेरिका के विभिन्न व्यापार विभागों के अधिकारियों की पूरी टीम दिल्ली में मौजूद थी।”
मंत्री के अनुसार, दोनों पक्ष समझौते में बची हुई खाइयों को पाटने और ऐसा समाधान निकालने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों को समान रूप से लाभ हो।
उन्होंने विश्वास जताया था कि व्यापार समझौते का पहला चरण जुलाई के मध्य तक अंतिम रूप ले सकता है। उन्होंने इसे “बहुत मजबूत और जीवंत पहला चरण” बताया, जो भविष्य में दोनों देशों के बीच गहरे आर्थिक सहयोग की नींव रखेगा।
यह प्रस्तावित व्यापार समझौता ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब भारत और अमेरिका दोनों आपूर्ति श्रृंखलाओं (सप्लाई चेन) में विविधता लाने, निवेश बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं।
यदि यह पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है, तो आगे चलकर भारत और अमेरिका के बीच एक अधिक व्यापक और बड़े व्यापार समझौते का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

