Tuesday, June 9, 2026
SGSU Advertisement
Home अपराध केरल: ‘काफिर स्क्रीनशॉट’ मामले की नई एसआईटी जांच से फिर गरमाई राजनीति

केरल: ‘काफिर स्क्रीनशॉट’ मामले की नई एसआईटी जांच से फिर गरमाई राजनीति

0
7

कोझिकोड, 8 जून (आईएएनएस)। केरल के बहुचर्चित ‘काफिर स्क्रीनशॉट’ मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की नई जांच के बीच डीवाईएफआई वडकारा ब्लॉक अध्यक्ष रिबेश रामकृष्णन ने अपने संगठनात्मक पद से इस्तीफा दे दिया है। एसआईटी द्वारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने से ठीक पहले उनके इस्तीफे ने मामले को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

यह विवाद 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान वेदाकारा संसदीय क्षेत्र में सामने आया था। यहां कांग्रेस के शफी परम्बिल और माकपा की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के. के. शैलजा के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था। अंततः शफी परांबिल ने जीत दर्ज कर सीपीएम को बड़ा झटका दिया था।

मामले की शुरुआती जांच पिनाराई विजयन सरकार के कार्यकाल में हुई थी, लेकिन पर्याप्त सबूत नहीं मिलने और स्क्रीनशॉट के मूल स्रोत का पता न चल पाने के कारण पुलिस ने जांच बंद कर दी थी।

हालांकि, वीडी सतीशन के नेतृत्व वाले यूडीएफ के सत्ता में आने के कुछ दिनों बाद इस मामले को फिर से खोला गया और नई एसआईटी को ताजा जांच का जिम्मा सौंपा गया।

रिबेश रामकृष्णन ने शनिवार को ब्लॉक अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया, हालांकि वह डीवाईएफआई ब्लॉक समिति के सदस्य बने रहेंगे। उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब एसआईटी ने विवादित स्क्रीनशॉट की उत्पत्ति और उसके प्रसार को लेकर जांच तेज कर दी है।

‘काफिर स्क्रीनशॉट’ विवाद तब शुरू हुआ था जब वडकारा लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सोशल मीडिया पर एक कथित फर्जी पोस्ट प्रसारित की गई थी, जिसमें ‘काफिर’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था। आरोप था कि यह पोस्ट यूडीएफ उम्मीदवार शफी परांबिल को निशाना बनाकर बनाई गई थी।

इस पोस्ट को लेकर यूडीएफ और एलडीएफ के बीच तीखा राजनीतिक विवाद छिड़ गया था। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि चुनावी माहौल को सांप्रदायिक रूप से प्रभावित करने और ध्रुवीकरण पैदा करने के उद्देश्य से यह सामग्री प्रसारित की गई थी।

शुरुआत में मामले में एमएसएफ नेता मोहम्मद कासीम के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में केरल हाई कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है।

डीआईजी यतीश चंद्र की निगरानी में और ग्रामीण एसपी टी. फराश के नेतृत्व में काम कर रही एसआईटी अब साइबर जांच के जरिए स्क्रीनशॉट तैयार करने वाले और इसे सबसे पहले प्रसारित करने वाले लोगों की पहचान करने में जुटी है।

नई जांच के तहत रिबेश रामकृष्णन के अलावा मनेश और अथुल को भी वडकारा क्राइम ब्रांच कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। अथुल और मनेश ‘रेड वॉलंटियर्स बटालियन’ नामक व्हाट्सएप समूह के सदस्य बताए जाते हैं।

सूत्रों के अनुसार, जांच का फोकस वामपंथी विचारधारा से जुड़े कुछ साइबर समूहों पर भी है। जांच में संकेत मिले हैं कि विवादित स्क्रीनशॉट संभवतः ‘वडकारा स्क्वाड’ नामक व्हाट्सएप समूह जैसे प्लेटफॉर्मों के माध्यम से सबसे पहले प्रसारित हुआ था।

एसआईटी ने पोस्ट के प्रसार से जुड़े ऑनलाइन समूहों के एडमिन और सदस्यों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। इससे पहले की जांच केवल कुछ सोशल मीडिया समूहों के प्रशासकों तक सीमित थी।

फिलहाल जांच का मुख्य उद्देश्य स्क्रीनशॉट के मूल स्रोत का पता लगाना, इसके निर्माण और प्रसार में शामिल लोगों की पहचान करना तथा यह जांचना है कि क्या इसे सांप्रदायिक संदेशों के जरिए चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से तैयार और प्रसारित किया गया था।