बेंगलुरु, 10 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (केआईएडीबी) अपने कामकाज के हर चरण को डिजिटल करने जा रहा है, जिसमें जमीन अधिग्रहण से लेकर औद्योगिक प्लॉट का आवंटन तक शामिल है। इस कदम से किसानों और औद्योगिक निवेशकों सहित सभी संबंधित लोगों को फायदा होने की उम्मीद है। बड़े और मध्यम उद्योगों के मंत्री एमबी पाटिल ने बुधवार को डिजिटाइजेशन पहल से जुड़े सभी कामों को पूरा करने के लिए 100 दिन की समय-सीमा तय की।
नई सरकार बनने के बाद खनिजा भवन में हुई दूसरी विभागीय प्रगति समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने अगले 100 दिनों में पूरे किए जाने वाले मुख्य कामों की रूपरेखा बताई और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए।
बैठक के बाद एमबी पाटिल ने कहा कि राज्य के पुराने और नए विकसित औद्योगिक क्षेत्रों में प्लॉट से जुड़ी हर जानकारी को सरकार के ई-गवर्नेंस विभाग द्वारा विकसित ‘इंटीग्रेटेड लैंड मैनेजमेंट सिस्टम’ के तहत डिजिटल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हर औद्योगिक प्लॉट के लिए 77 डेटा फील्ड बनाए रखे जाएंगे।
प्लॉट आवंटन, उनकी मौजूदा स्थिति, उन पर चल रहे उद्योग, किए गए निवेश, पैदा हुए रोजगार, प्रभावित किसानों को दिया गया मुआवजा, अदालती मामले और निवेशकों को दी गई समय-सीमा से जुड़ी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए तुरंत उपलब्ध होगी।
उन्होंने बताया कि इस पहल से न केवल पुराने रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने से जुड़ी चुनौतियां खत्म होंगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित होगा कि सारी जानकारी हमेशा के लिए सुरक्षित रहे।
पाटिल ने कहा कि पहले, रिकॉर्ड मैनेजमेंट ठीक से न होने के कारण कुछ मामलों में एक ही जमीन के टुकड़े के लिए दो बार मुआवजा दिया गया था।
उन्होंने कहा कि नया सिस्टम पूरी पारदर्शिता लाएगा और निवेशकों को कहीं से भी जरूरी जानकारी पाने में मदद करेगा, जिससे बिचौलियों की जरूरत खत्म हो जाएगी।
कर्नाटक में अभी 224 औद्योगिक क्षेत्र हैं और इन क्षेत्रों में हजारों प्लॉट से जुड़े रिकॉर्ड जल्द ही स्कैन करके सुरक्षित रूप से डिजिटल किए जाएंगे।
मंत्री ने कहा कि यह पहल उद्योग विभाग में नागरिकों के अनुकूल सुधार लाने की सरकार की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में प्लॉट आवंटन रिकॉर्ड की स्कैनिंग एक महीने के भीतर पूरी करें।
इसके बाद, डिजिटल डेटा को ई-गवर्नेंस विभाग के साथ साझा किया जाएगा, ताकि कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड की जरूरतों के हिसाब से सॉफ्टवेयर बनाया जा सके। इसके बाद सिस्टम को ग्रामीण विकास विभाग के ई-स्वथु प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा जाएगा।
उन्होंने कहा कि इससे ई-खाता जारी करने समेत कई प्रक्रियाओं में आसानी होगी और संबंधित सेवाओं को सुव्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।

