नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पश्चिम एशिया (खाड़ी देशों) में रहने वाले सीबीएसई के निजी (प्राइवेट) छात्रों के 12वीं कक्षा के परिणाम घोषित करने के लिए नई नीति तैयार की जा रही है। इन छात्रों के परिणाम क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण घोषित नहीं हो सके थे।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से मामले की सुनवाई 22 जून तक स्थगित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकार याचिका में उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर विचार कर रही है और जल्द ही पश्चिम एशिया के उन निजी छात्रों के लिए नीति लाई जाएगी, जिनके सीबीएसई परिणाम युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण घोषित नहीं हो सके। सरकार भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से प्रभावित छात्रों के लिए भी एक समान नीति बनाने पर विचार कर रही है।
गौरतलब है कि मार्च 2026 में क्षेत्रीय सुरक्षा संकट को देखते हुए सीबीएसई ने पश्चिम एशिया के कई देशों में कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी थीं। बोर्ड ने 1 मार्च के बाद जारी अपने छठे परिपत्र में स्पष्ट किया था कि पहले स्थगित किए गए प्रश्नपत्र भी रद्द माने जाएंगे।
15 मार्च को जारी अधिसूचना के अनुसार, 16 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) स्थित सीबीएसई संबद्ध स्कूलों की परीक्षाएं रद्द कर दी गई थीं।
इस वर्ष सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं के लिए कुल 43.7 लाख से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया था। इनमें लगभग 25.1 लाख छात्र कक्षा 10 और करीब 18.6 लाख छात्र कक्षा 12 की परीक्षा में शामिल हुए थे।
खाड़ी देशों में रहने वाले छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि सुरक्षा स्थिति के कारण परीक्षाएं रद्द होने के बावजूद उनके कक्षा 12 के परिणाम घोषित नहीं किए गए, जिससे उनके भविष्य पर असर पड़ रहा है।
8 जून को सुप्रीम कोर्ट ने सऊदी अरब के कक्षा 12 के छात्र प्रांशु जिगरकुमार पटेल की याचिका पर सीबीएसई और उसके दुबई स्थित क्षेत्रीय कार्यालय को नोटिस जारी किया था। छात्र ने अपनी याचिका में कहा था कि पश्चिम एशिया के छात्रों के लिए विशेष मूल्यांकन योजना बनाए जाने के बावजूद उसका परिणाम रोका गया है।
न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने इस मामले में सीबीएसई और उसके दुबई क्षेत्रीय कार्यालय से जवाब मांगा था।
पिछली सुनवाई के दौरान सीबीएसई की ओर से अदालत को बताया गया था कि याचिकाकर्ता छात्र का मूल्यांकन संबंधित स्कूल द्वारा किया जाना आवश्यक था, लेकिन वह निजी अभ्यर्थी (प्राइवेट कैंडिडेट) के रूप में परीक्षा में शामिल हुआ था, इसलिए उसके मूल्यांकन का कोई स्कूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में प्रांशु पटेल ने कहा है कि परिणाम घोषित न होने से उसकी उच्च शिक्षा की संभावनाएं प्रभावित हुई हैं और उसे विभिन्न संस्थानों में प्रवेश के अवसरों से वंचित होना पड़ा है।

